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Hoshiarpur: दिलीप सिंह उर्फ द ग्रेट खली अपनी पहचान के लिए किसी का मोहताज नहीं - Uturn Time
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द ग्रेट खली की पहचान खुद में ही एक ब्रांड
होशियारपुर (दलजीत अजनोहा): दलीप सिंह राणा जो ग्रेट खली के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं का नाम आज बच्चे बच्चे की जुबान पर है।उनके जीवन और उपलब्धियों के बारे में बातचीत करने हेतू वरिष्ठ संवाददाता दलजीत अज्नोहा की ओर से उनसे समय लेकर मिला गया इस बातचीत के दौरान उन्होंने जो कुछ अपने जीवन , संघर्ष व उपलब्धियों और भविश्य की पलानिंग के बारे में बताया उसे अपने पाठकों के समक्ष अक्षरों के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ। दलीप सिंह राणा (दि ग्रेट खली) का जन्म 29 अगस्त 1972 को हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गांव मीरईना में पिता की ज्वाला राम व माता श्रीमती टंडी देवी के घर हुआ। दलीप सिंह राष्णा अपने आठ भाई बहनों में तीसरे नंबर पर थे। उनके बड़े भाई मंगल सिंह राणा जी पंजाब पुलिस में सहायक थानेदार है बहन दया देवी की शादी हिमाचल के ही गुमान सिंह के साथ हो चुकी है। तीसरे नंबर पर चलीप सिंह राणा स्वंय है इनसे छोटे भाई भगत सिंह राणा जो अध्यापक है. छोटे भाई इंद्र सिंह राणा की सांव में ही डेयरी है। अतर सिंह राणा यंत्र में करिवाने की दुकान करते है सुरिदर सिंह राणा कंगलीबाल अकादमी ही रहते है और सबसे छोटा भाई राणा अमरीका में पक्के तौर पर रहते है। हिमाचल प्रदेश में छोटे से गांव में रहने वाले किसान की ज्वाला राम उनकी पत्नी टंडी देवी ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके परिवार में जन्म लेने वाला दलीप सिंह राणा जो अपने साथ साथ गांव शहर प्रदेश और देश का नाम पूरी दुनियां में रोशन करेगा। दलीप सिंह केपरिवार में दूसरे भाई बहन पढ़ते थे पर दलीप सिंह घर में अपने पिता के साथ खेती करता था और पड़ने कभी गया ही नहीं था समय के चलते जब वह करीब 17-18 वर्ष का हुआ तो यह शिमला के एक प्राईवेट कराटे कोच से कराटे सीखने सीखने लगा। उन्होंने दलीप सिंह राणा को जालंधर बुलाया वह उस समय करीब 21 वर्ष के थे। उस समय स. महिल सिंह भुल्लर ने दलीप सिंह राणा को 75 बटालियन पी ए पी में कांस्टेबल भर्ती करके उसे शाट पुट की गेम करने के लिए कहा। जिस पर दलीप सिंह राणा का बेशक शाट पुट गेम में कोई दिलचस्पी नही थी फिर भी उन्होंने मेहनत आरम्भ कर दी। दलीय सिंह राणा के भर्ती होने के पश्चात हुए पहले जाब शाट पुट इंटर घंटेट मुकाबलों मेंपहला स्थान प्राप्त किया। इसी के साथ ही कुछ समय पश्चात हुए कड़ी बिल्डिंग मुकाबलोंमें भाग लिया जिसमें दलीप सिंह राणा कापहले 10 नंबरों (टीप टैर में यम आ गया।उस समय हो रहे मुकाबलों के दौरान महिल सिंहभुल्लर वहां पर उपस्थित थे। उन्होंने उसी समय दलीप सिंह राणा की पदोन्नत करके हवलदार बना दिया। समय अपनी चाल चलता गया और 1996 में हुए बाड़ी बिल्डिंग मुकाबलों में में दलीप सिंह राणा मिस्टर पंजाब बने और साथ ही हुए दूसरे मुकाबले मिस्टर नार्थ इंडिया बने और इसी तरह मेहनत करते रहे वर्ष 1997 आप मिस्टर इंडिया बने। इसी दौरान श्री राणा ने अपनी विदेश जाने की चाहत को मुख्य रखते अमरीका के शहर सनफ्रांसिसकों में रैसलिंग की कोचिंग लेने की बात की जिस पर स. महिल सिंह सिंह भुल्लर ने इनका पासपोर्ट यह कह कर अपने पास रख लिया कि भारत का नायव हीरा विभाग में रहकर ही देश का नाम रोशन करेगा।सम य चलता गया एक दिन समय ने कर वट बदली मलेशिया में बाड़ी बिल्डिंग के मुकाबले आरम्भ हो गए और वहां से दलीप सिंह की बीजा मिल गया जिसके लिए बाड़ी बिल्डिंग फैडरेशन की ओर से दलीप सिंह से 40 हजार रुपए की मांग की जो उस समर इनके लिए बहुत बड़ी रकम थी इकोने अपने विभाग से 40 हजार रुपए की मांग को तो पुलिस विभाग के कोष अधिकारियों ने इन्हें यह कहकर टाल दिया कि विभाग का कोष तो खाली पड़ा है इसमे पैसे नही है परन्तु हम आपको वहां जाने की इजाजत दे देते है। उन्होंने इजाजत मिलते ही अपना पासपोर्ट विभाग से लिया और मलेशिया जाने की जगह 2000 में अमरीका चले गए और वहां इन्होंने सनफ्रांसिसको में करीब एक वर्ष रैसलिंग की शिक्षा प्राप्त की और 2001 में जापान के टोकियो टाऊन में पहली फाईट की जिसमें इनकी पहली फाईट नागत से और ची तरे से हुई यहां इन्हें पहली आमदन हुई। दलीप सिंह राणा इसी तरह अपना सफर तय करते करते शादी करवाई बेटी और बेटे पिता बने और हरियाणा करनाल के समीप खली ढाबा खोला जिसकी ऑपनिंग के समय पंजाब ,हरियाणा ,हिमाचल के गणमान्य लोग रेसलर भारी गिनती में शामिल हुए अभी भी दलीप सिंह राणा इंट्राग्राम,और सोशल मीडिया द्वारा समाज के हेतु संदेश देते रहते है इनके करोड़ों फैंस इनकी एक झलक देखने का इंतजार करते रहते है दलीप सिंह राणा बहुत हो मिलनसार स्वभाव के मालिक है