“फिटे मुंह सरकार का” नारे के साथ प्रदर्शन तेज
जगरांव(चरणजीत सिंह चन्न): पंजाब सरकार की वादाखिलाफी और अपनी मांगों को लेकर सफाई सेवकों व म्युनिसिपल कर्मचारियों का आंदोलन अब उग्र रूप धारण कर चुका है। म्युनिसिपल एक्शन कमेटी पंजाब और सफाई सेवक यूनियन के नेतृत्व में चल रही हड़ताल आज छठे दिन में प्रवेश कर गई, जिसके चलते शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
शहर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब: हड़ताल के छठे दिन जगरांव में सफाई सेवकों, सीवरमैनों, कंप्यूटर ऑपरेटरों, पंप ऑपरेटरों, मालियों और इलेक्ट्रिशियनों ने मिलकर एक विशाल रोष रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इस कदर था कि पूरे शहर में “छठा दिन हड़ताल का-फिटे मुँह सरकार का” के नारे गूँज उठे।
रैली का मार्ग: यह रोष मार्च नगर परिषद से शुरू होकर कमल चौक, कुक्कड़ चौक, मेन दरवाजा, नलकेया वाला चौक, फिल्ली गेट और रायकोट अड्डा होते हुए झांसी रानी चौक पर समाप्त हुआ।
प्रतीकात्मक विरोध: झाड़ू के किए टुकड़े-टुकड़े: सरकार की नीतियों के प्रति अपना रोष प्रकट करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चौकों पर प्रतीकात्मक रूप से झाड़ू को तीला-तीला (बिखेरना) कर दिया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे काम पर नहीं लौटेंगे। इस प्रदर्शन को शहर की विभिन्न सामाजिक और मजदूर जत्थेबंदियों का भी भरपूर समर्थन मिला।
"सफाई सेवकों के हक की लड़ाई को दबाने की कोशिश न करें राजनीतिक नेता। अगर हमारे संघर्ष को कमजोर करने का प्रयास हुआ, तो यूनियन और भी कड़े फैसले लेने को मजबूर होगी।"- अध्यक्ष अरुण गिल
विभिन्न संगठनों ने दिया समर्थन: झांसी रानी चौक पर हुई सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न नेताओं ने सफाई सेवकों की जायज मांगों और शहर की सफाई के स्थाई समाधान के लिए अपना समर्थन जताया।
इस मौके पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे: इंकलाबी केंद्र पंजाब: कमलजीत खन्ना अध्यक्ष,नगर सुधार सभा मास्टर अवतार सिंह, फूड एंड अलाइड वर्कर यूनियन: अवतार सिंह बिल्ला,भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा): इंद्रजीत धालीवाल।
प्रमुख उपस्थिति:
रैली में अमित कल्याण (सेंट्रल वाल्मीकि सभा), अशोक भंडारी (साझा पेंशन फ्रंट), सतपाल सिंह देहड़का (ग्रीन मिशन पंजाब), राज कुमार (सीवरमैन यूनियन अध्यक्ष), चेयरमैन बुद्ध राम, सनी, सुंदर भूषण कुमार गिल और बड़ी संख्या में म्युनिसिपल कर्मचारी शामिल हुए।
मुख्य मांगें: कर्मचारियों का पक्का किया जाना, बकाया वेतन की अदायगी और पुरानी पेंशन बहाली जैसे मुद्दों पर कर्मचारी अड़े हुए हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस तीखे विरोध के आगे कब झुकती है।