"डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड पर लगातार बढ़ रहा खर्च, करोड़ों लगाने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ कचरा संकट"
चंडीगढ़ (अजीत झा.): शहर के डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड को खत्म करने के लिए नगर निगम लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म होती नजर नहीं आ रही। पुराने कचरे के निस्तारण से लेकर नए प्लांटों के विस्तार तक कई परियोजनाओं पर भारी रकम खर्च की जा चुकी है।
नगर निगम ने अब डड्डूमाजरा स्थित 300 टन प्रतिदिन क्षमता वाले वेट वेस्ट प्लांट के शेड विस्तार के लिए नया टेंडर जारी किया है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2.42 करोड़ रुपये तय की गई है और इसे नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तकनीकी बोलियां 18 मई को खोली जाएंगी।
इसके अलावा 10 टन प्रतिदिन क्षमता वाले पृथक्करण संयंत्र के शेड विस्तार के लिए भी दोबारा निविदा जारी की गई है। इस कार्य पर करीब 1.27 करोड़ रुपये खर्च होंगे और छह माह में काम पूरा करने की योजना है। इसकी तकनीकी बोली 13 मई को खुलेगी।
नगर निगम पहले ही डंपिंग ग्राउंड पर जमा पुराने कचरे की बायोमाइनिंग प्रक्रिया पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसके बावजूद कचरे का पूरी तरह निस्तारण नहीं हो पाया। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नगर निगम को 25 मई तक डंपिंग साइट से कचरा हटाने, जमीन की लेवलिंग करने और मिट्टी की परत बिछाने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि लेवलिंग के दौरान साइट पर कहीं भी प्लास्टिक, पॉलिथीन या अन्य कचरा दिखाई नहीं देना चाहिए। इसके बाद नगर निगम पर तय समय में काम पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।
नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि अब केवल मशीनों के नीचे दबा हुआ पुराना कचरा ही बचा है और उसे भी हटाने का काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले दिनों में पूरा क्षेत्र साफ कर दिया जाएगा।
इसी बीच नगर निगम ने शहर की अन्य विकास परियोजनाओं के लिए भी टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। सेक्टर-26 के सामुदायिक केंद्र के जीर्णोद्धार पर करीब 56 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि रायपुर कलां में प्रस्तावित गौशाला फेस-2 की चारदीवारी निर्माण पर लगभग 1.96 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
पिछली सदन बैठक में गौशाला शेड विस्तार और पशु शव निस्तारण केंद्र से जुड़े प्रस्ताव भी लाए गए थे, हालांकि शव निस्तारण केंद्र का प्रस्ताव मंजूर नहीं हो सका था।