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Hoshiarpur: थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता ही उपचार में सहायक : डॉ. एस.जे. सिंह - Uturn Time
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जिला स्तरीय जागरूकता सेमिनार आयोजित
होशियारपुर (दलजीत अज्नोहा): स्वास्थ्य विभाग पंजाब के निर्देशों तथा सिविल सर्जन डॉ. मनदीप कौर के दिशा-निर्देशों अनुसार जिले भर में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग की अगुवाई में विश्व थैलेसीमिया दिवस संबंधी आई.ई.सी. गतिविधियों के तहत जागरूकता सेमिनार आयोजित किए गए। सिविल अस्पताल में वर्धमान यार्न एंड थ्रेड्स लिमिटेड के सहयोग से आयोजित जिला स्तरीय सेमिनार के दौरान पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉरपोरेशन चंडीगढ़, पंजाब के डायरेक्टर डॉ. एस.जे. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. स्वाति शीमार, सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. नवजोत सिंह, सीनियर मेडिकल अधिकारी डॉ. नेहा पाल, डॉ. वैशाली, डॉ. सुप्रीत, डॉ. रणवीर, वर्धमान ग्रुप से मैडम पूनम पाल, जिला मास मीडिया अधिकारी तरसेम लाल, डिप्टी मास मीडिया अधिकारी रविंदर जस्सल, ब्लॉक हेल्थ एजुकेटर रोहित शर्मा, साइकोलॉजिस्ट मुस्कान तथा स्टाफ नर्स रेनू सहित नर्सिंग विद्यार्थिनी उपस्थित थीं। इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. एस.जे. सिंह ने बताया कि इस वर्ष की थीम “अब और नहीं छिपा: अनपहचाने मरीजों की खोज और अनदेखे लोगों को सहायता प्रदान करना” है। इस थीम का उद्देश्य थैलेसीमिया के अनपहचाने मामलों की शीघ्र पहचान, स्क्रीनिंग, जागरूकता बढ़ाना तथा मरीजों को बेहतर उपचार और सहयोग प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि इस दिवस का मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया के बारे में ज्ञान साझा करना, जानकारी का आदान-प्रदान करना तथा गुणवत्तापूर्ण थैलेसीमिया शिक्षा प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता ही इसके उपचार में सबसे बड़ी सहायक है। लेकिन समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बहुत कम है, जिसके कारण अनजाने में छोटे बच्चे इस बीमारी का शिकार हो जाते हैं। इसलिए लोगों को इस बीमारी के बारे में अधिक से अधिक जागरूक करना आवश्यक है ताकि नवजात बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। इस दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित गतिविधियों के माध्यम से आम नागरिकों को रक्तदान के प्रति भी प्रेरित किया जा रहा है, ताकि थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यदि थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों का उपचार समय पर शुरू हो जाए तो वे सामान्य और बेहतर जीवन व्यतीत कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न ब्लॉकों में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों को थैलेसीमिया संबंधी अधिक से अधिक जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नागरिकों को इस रोग के बारे में सही जानकारी मिल सके। यदि किसी बच्चे का जन्म के बाद शारीरिक और मानसिक विकास सही ढंग से नहीं हो रहा हो तो उसकी स्वास्थ्य जांच अवश्य करवानी चाहिए। उन्होंने लोगों से रक्तदान करने तथा थैलेसीमिया मरीजों की सहायता के लिए आगे आने की अपील भी की। स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्कूलों, कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों में भी जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं ताकि लोगों को इस बीमारी के बारे में सही जानकारी मिल सके। इस अवसर पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरनूरजीत कौर ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रोग है तथा इससे पीड़ित बच्चों के शरीर में सामान्य से बहुत कम रक्त बनता है। ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन जीने के लिए नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। इस बीमारी में नवजात बच्चे में रक्त बनने की प्रक्रिया बहुत कम होती है, जिसके कारण हर 10 से 15 दिन बाद रक्त चढ़ाना पड़ता है। यह बीमारी माता-पिता से पीढ़ी दर पीढ़ी बच्चों में पहुंचती है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बच्चा सामान्य दिखाई देता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसमें खून की कमी होने लगती है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी के माध्यम से इस बीमारी से बचाव संभव है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक रक्तदान अभियान से जुड़ने की अपील की ताकि जरूरतमंद बच्चों और अन्य मरीजों की रक्त आवश्यकता पूरी की जा सके। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों में शारीरिक विकास रुक जाना, भूख कम लगना, त्वचा का पीला पड़ना तथा हड्डियों का सही विकास न होना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इस अवसर पर नर्सिंग विद्यार्थियों द्वारा जागरूकता पोस्टर भी तैयार किए गए तथा उनकी प्रस्तुति दी गई। थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों ने भी रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया। बच्चों ने ड्राइंग प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा दिखाई और अपने भविष्य के सपनों को सभी के साथ साझा किया। बच्चों ने आयोजित फन एक्टिविटीज का भी भरपूर आनंद लिया। इस अवसर पर वर्धमान ग्रुप द्वारा बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए विशेष रूप से रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था भी की गई।