जीरकपुर 15 Feb : वार्ड नंबर-13 में पिछले लंबे समय से इंटरलॉकिंग टाइलें बिछाने की मांग कर रहे स्थानीय लोग अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के रवैये से निराश नजर आ रहे हैं। उरवा वेलफेयर के प्रधान कुलभूषण शर्मा, हरमेश धीमान, सतीश शर्मा, एस.के. ढींगरा और विनोद शर्मा ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल केवल श्रेय लेने की होड़ में लगे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम आगे नहीं बढ़ रहा।
स्थानीय निवासियों के अनुसार करीब डेढ़ महीने पहले नगर परिषद के प्रधान उदयवीर ढिल्लों और कांग्रेस कार्यकर्ता सुखवीर लवली इंटरलॉकिंग टाइलों और अन्य निर्माण सामग्री के पहुंचने पर मौके पर पहुंचे थे। उस दौरान फोटो खिंचवाकर यह दावा किया गया कि वार्ड-13 में कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि, हकीकत यह है कि आज तक टाइलें उसी स्थान पर पड़ी हुई हैं और काम अधूरा है।
कुलभूषण शर्मा ने बताया कि डेढ़ महीने बाद आम आदमी पार्टी के नेता हरजोत सिंह भी अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे और अधूरी स्थिति में ही फोटो खिंचवाकर चले गए। लोगों का कहना है कि नेताओं के दौरे और फोटोशूट तो हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर विकास कार्य ठप पड़े हैं।
निवासियों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद का कोई संबंधित अधिकारी—न तो एसडीओ और न ही जेई—मौके पर आकर कार्य की जांच करता है। ठेकेदार अपने स्तर पर बिना उचित निगरानी के टाइलें बिछाकर चले जाते हैं। कई स्थानों पर केवल मिट्टी डालकर उस पर टाइलें बिछा दी गई हैं, जबकि ड्रेनेज पाइपलाइन की स्पष्ट योजना और पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बरसात के दौरान पानी सड़कों और घरों में घुस जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। हरमेश धीमान, सतीश शर्मा और एस.के. ढींगरा सहित अन्य निवासियों ने मांग की है कि नगर परिषद के अधिकारी तुरंत मौके का निरीक्षण करें, गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें और ड्रेनेज व्यवस्था को प्राथमिकता दें, ताकि वार्ड-13 के लोगों को राहत मिल सके।
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कार्यकारी अधिकारी ने नहीं उठाया फोन
इस संबंध में जब नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी परमिंदर सिंह भट्टी से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उल्लेखनीय है कि डीसी मोहाली कोमल मित्तल पहले ही अधिकारियों को निर्देश दे चुकी हैं कि जनता से जुड़ी समस्याओं के संबंध में आने वाले फोन कॉल का जवाब देना अनिवार्य है। इसके बावजूद नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी द्वारा फोन न उठाए जाने पर सवाल खड़े हो रहे