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चंडीगढ़ 14 Jan : ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और सरकारी दमन के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या किसी भी नेता के सामने संभावित सैन्य कार्रवाई का निर्णय बेहद जटिल हो गया है। मिसाइल हमले या ठिकानों पर हवाई हमले से परे, इस फैसले में कानूनी, रणनीतिक और मानवीय पहलुओं का तौलना जरूरी है। मुख्य सवाल यह है कि हमले से असल में क्या हासिल होगा—क्या यह ईरान की परमाणु क्षमता रोकने, प्रदर्शनकारियों के प्रति शासन को जवाबदेह ठहराने या देश की आंतरिक अस्थिरता बढ़ाने के उद्देश्य से होगा। सैन्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सीमित हवाई हमले भी ईरान की क्षमताओं को खत्म नहीं कर सकते और पूरे क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का जोखिम बढ़ा सकते हैं। ईरान मिसाइल हमलों, प्रॉक्सी मिलिशिया और तेल मार्गों में रुकावट के जरिए अमेरिका पर हमला करने में सक्षम है, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा गंभीर हो सकता है। देश के अंदर विरोध प्रदर्शन और सैकड़ों नागरिकों की कथित मौतों ने नैतिक और मानवीय दांव और बढ़ा दिए हैं। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है, लेकिन सीधे मिलिट्री दखल का संकेत नहीं दिया। कानूनी पहलू भी चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि अमेरिकी संविधान युद्ध की घोषणा की शक्ति कांग्रेस को देता है। इतिहास बताता है कि बाहरी हमलों से कमजोर सरकारें कभी-कभी और मज़बूत हो जाती हैं। ऐसे में ट्रंप को यह तय करना होगा कि हमला ईरान के लिए मददगार होगा या क्षेत्रीय और वैश्विक नतीजों को असंतुलित कर देगा। अमेरिका के सामने अब यह चुनौतियों, कानून और मानवीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने का कठिन मोड़ है।
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