अवैध माफिया’ को मिले संरक्षण की निष्पक्ष विजिलेंस जांच हो :नरेश अरोड़ा
चंडीगढ़ :सेक्टर-20 स्थित मस्जिद के साथ लगते क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से अवैध रूप से लग रही कपड़ा मार्केट के खिलाफ नगर निगम प्रशासन द्वारा हाल ही में की गई कार्रवाई का स्वागत है। यह कार्रवाई न केवल शहर की व्यवस्था के हित में है, बल्कि इससे नगर निगम को हो रहे बड़े वित्तीय नुकसान को रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
भाजपा नेता नरेश अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर जब शहर में सप्ताह में एक दिन की अधिकृत मंडी लगती है तो नगर निगम पर्ची काटकर स्ट्रीट वेंडर्स से निर्धारित शुल्क वसूल करता है, और शहर के अन्य स्थानों पर भी पंजीकृत रेहड़ी-फड़ी वाले नियमित रूप से फीस जमा करते हैं। लेकिन सेक्टर-20 मस्जिद के साथ लग रही तथाकथित “कपड़ा मार्केट” में न तो एक भी चंडीगढ़ का लाइसेंसधारक रेहड़ी-फड़ी वाला था और न ही कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही थी। यह पूरी तरह अवैध व्यवस्था थी, जिसके कारण नगर निगम को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हुआ।
नरेश अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि नगर निगम लाइसेंसधारक रेहड़ी-फड़ी वालों के अधिकारों और आजीविका के साथ खड़ी है। एक ओर जहां नगर निगम शहर भर में लाइसेंसधारक रेहड़ी-फड़ी वालों को व्यवस्थित कर उनकी निर्धारित जगहों पर भेज रहा है, वहीं दूसरी ओर सेक्टर-20 में बिना लाइसेंस, अवैध तरीके से चल रहे “ फड़ी माफिया” को संरक्षण दिया जाना गंभीर चिंता का विषय है। यह दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं है।
नरेश अरोड़ा ने कहा कि यह अवैध मार्केट पिछले चार वर्षों से बड़े पैमाने पर चलती रही, जिससे यह सवाल उठता है कि:
यह संरक्षण किस नेता के दबाव में दिया गया?
यह किसी नगर निगम अधिकारी की मिलीभगत का परिणाम था
क्षेत्र के कांग्रेस पार्षद ने न तो इसे रोकने के लिए कोई ठोस पहल की और न ही नगर निगम हाउस में इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाया। अपने ही वार्ड में चल रही इतनी बड़ी अवैध गतिविधि पर मौन रहीं