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भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और जांच प्रभावित करने का आरोप लगाया, निष्पक्ष जांच की मांग
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में पत्र की प्रति पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को भी भेजी गई है। मीडिया से बातचीत करते हुए तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में इस प्रकार का विवाद अत्यंत गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े एक कथित विवादित वीडियो को लेकर उत्पन्न मामले में धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। चुघ ने कहा कि वायरल वीडियो को लेकर जब विभिन्न स्तरों पर सवाल उठे तो मुख्यमंत्री की ओर से इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार वीडियो बताया गया। उन्होंने दावा किया कि बाद में स्वतंत्र जांच में अलग तथ्य सामने आए, जिसके बाद विवाद और गहरा गया। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मामले से जुड़े तथ्यों को प्रभावित करने के लिए सरकारी तंत्र, वरिष्ठ अधिकारियों और कथित फॉरेंसिक रिपोर्टों का सहारा लिया गया। उन्होंने कहा कि यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल सत्ता के दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय भी है। तरुण चुघ ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले सभी पहलुओं की पड़ताल की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रह सकती है। इसलिए मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संवैधानिक और कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। भाजपा नेता ने पंजाब की जनता, धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था और संस्थागत मर्यादाओं से भी जुड़ा हुआ है। चुघ ने कहा कि पंजाब की पहचान उसकी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से है तथा सभी पक्षों को इस विरासत और संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मामले की निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी और जनता के मन में उठ रहे सवालों का समाधान होगा।