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तबादलों और लंबित नाइट ओवरटाइम भुगतान पर बनी सहमति, प्रदेशभर में बस सेवाएं सामान्य रूप से रहेंगी जारी
शिमला (Narendra Singh Danu) : हिमाचल प्रदेश में लाखों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालक और परिचालक अब हड़ताल पर नहीं जाएंगे। बुधवार देर शाम सरकार और एचआरटीसी चालक-परिचालक यूनियन के बीच हुई अहम वार्ता सफल रहने के बाद यूनियन ने आधी रात से प्रस्तावित प्रदेशव्यापी हड़ताल और चक्का जाम का निर्णय वापस लेने की घोषणा कर दी। उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री Mukesh Agnihotri ने समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकाल लिया गया है और गुरुवार से प्रदेशभर में एचआरटीसी की सभी बस सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होंगी। हड़ताल से कुछ घंटे पहले बनी सहमति कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से यूनियन और निगम प्रबंधन के बीच तनाव बना हुआ था। यूनियन ने चेतावनी दी थी कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने की स्थिति में 24 जून की रात 12 बजे से चालक और परिचालक बसों का संचालन बंद कर देंगे। इस घोषणा के बाद यात्रियों और पर्यटकों की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि हड़ताल शुरू होने से कुछ घंटे पहले हुई निर्णायक वार्ता में दोनों पक्ष कई मुद्दों पर सहमति बनाने में सफल रहे, जिसके बाद आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया गया। तबादलों और ओवरटाइम भुगतान पर समाधान सूत्रों के अनुसार बैठक में कर्मचारियों के हालिया तबादलों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। यूनियन का आरोप था कि कई तबादले नियमों और व्यावहारिक परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए किए गए हैं। वार्ता के दौरान इन मामलों की समीक्षा कर संबंधित तबादलों को रद्द करने पर सहमति बनी। इसके अलावा चालक और परिचालकों के पिछले 12 महीनों से लंबित नाइट ओवरटाइम भत्ते के भुगतान का मुद्दा भी बैठक में प्रमुख रहा। सरकार और प्रबंधन की ओर से इस संबंध में सकारात्मक आश्वासन दिए जाने के बाद यूनियन ने इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। कई दिनों से जारी था गतिरोध यूनियन लंबे समय से वित्तीय देनदारियों, भत्तों, ओवरटाइम भुगतान, सेवा शर्तों और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांगें उठा रही थी। मंगलवार को भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन तब कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका था। इसके बाद यूनियन ने आंदोलन तेज करने के संकेत दिए थे, जिससे प्रदेशभर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई थी। खासकर पर्यटन सीजन के दौरान संभावित हड़ताल को लेकर सरकार और प्रशासन भी सतर्क हो गया था। सरकार ने रखी थी वैकल्पिक तैयारी हड़ताल की चेतावनी के बीच राज्य सरकार ने एक ओर वार्ता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास जारी रखा, वहीं दूसरी ओर बस सेवाएं बाधित न हों इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी शुरू कर दी थी। सरकार ने स्पष्ट किया था कि आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी। इसी क्रम में एचआरटीसी प्रबंधन ने 656 अस्थायी चालकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करते हुए विभिन्न डिपो और क्षेत्रीय कार्यालयों में वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए थे। यात्रियों को मिली बड़ी राहत हड़ताल टलने से प्रदेश के लाखों यात्रियों ने राहत की सांस ली है। एचआरटीसी को हिमाचल की जीवनरेखा माना जाता है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसकी बस सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। विशेष रूप से दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मरीजों और पर्यटकों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन साधन है। हड़ताल टलने से न केवल आम जनजीवन प्रभावित होने से बच गया, बल्कि पर्यटन सीजन के दौरान प्रदेश की परिवहन व्यवस्था भी सुचारु बनी रहेगी।