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Ludhiana: स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी, झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय - Uturn Time
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"सभी चिकित्सा पद्धतियों में नियमों की अनदेखी"
लुधियाना अशोक सहगल): जिले में हर चिकित्सा प्रणाली के नाम पर गैरकानूनी प्रैक्टिस हो रही है और बिना डिग्री के डॉक्टरों का इन दिनों काफी बोल वाला है इनमें से कोई शर्तिया लाइलाज रोग का इलाज करने वाले भी शामिल है आयुर्वेद के नाम पर बिना डिग्री के डॉक्टर जोड़ों के दर्द से लेकर कैंसर तक का इलाज कर रहे हैं और जिले में माहवारी की तरह फैले हुए हैं मल्लापुर के निकट भी एक नीम हकीम काफी चर्चा में रहता है जो दवाइयां उसके द्वारा दी जाती हैं किसी पर ना तो नाम लिखा होता है और ना ही दवा का फार्मूला परंतु यह है ब्लड प्रेशर शुगर हार्ट ब्लॉकेज कैंसर एड्स घुटनों का दर्द सर्वाइकल के मरीजों को गुमराह कर पैसे एठ रहे हैं आयुर्वेद विभाग के पास अगर कोई शिकायत आती है तो ऐसे नेम है कीमो द्वारा दी जा रही दवाइयां के सैंपल ऐसे भरे मन से लिए जाते हैं मानव कोई पाप कर्म कर लिया हो लोगों का कहना है कि सारा गोरख धंधा मिली भगत से ही चलता है स्वास्थ्य अधिकारियों की मेहरबानियां के चलते अब ऐसे नीम हकीम सप्ताह में एक-एक दिन कई शहरों में अपनी दुकान लगाते हैं ना कोई दवा का नाम ना फॉर्मूला करते हैं सार्वजनिक ऐसे डॉक्टरों द्वारा लूट कर आए हुए लोगों का कहना है कि इनके द्वारा दी गई दवा के ऊपर दवा के नाम की जगह नंबर लिखा होता है और ना ही उसे पर कोई लेवल होता है जिस पर दवा के घटक सार्वजनिक किए गए हो या फार्मूला लिखा हो जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं जबकि हर दवा निर्माता को अपनी दवा बनाने से पहले आयुर्वेद विभाग से अपना फार्मूला पास करना होता है जिससे विभाग की सलाहकार कमेटी और आयुर्वेद विभाग के डायरेक्टर की सहमति आवश्यक होती है लोगों का कहना है कि आयुर्वेद विभाग की सलाहकार कमेटी सहित ऐसे आयुर्वेदिक अधिकारियों की भूमिका को गहन जांच की आवश्यकता है। ड्रग विभाग के सौजन्य से होती है एलोपैथी की प्रैक्टिस पिछले कुछ वर्षों में जहां बिना डिग्री के डॉक्टरों की संख्या ड्रग विभाग की मुस्तादी के चलते कम होनी चाहिए थी परंतु यह पहले से बढ़ चुके हैं और यह महामारी को पालने का जिम्मा ड्रग विभाग का बताया जाता है फार्मेसी की डिग्री करने के बाद किसी ने लाइसेंस लेना हो तो ड्रग विभाग उसके इतने चक्कर लगवा देता है कि वह थक हार कर हथियार डाल देता है परंतु यहां बात दूसरी है शहर के हर कोने में बिना डिग्री के डॉक्टर किसी महामारी से कम नहीं किसी के पास पैरामेडिकल संगठन की मेंबरशिप का सर्टिफिकेट है किसी का कहना है कि वह तो बचपन से ही एलोपैथी की प्रैक्टिस कर रहा है प्लस टू करने के बाद वह फील्ड में आ गया था हेब्बोवाल, चुहडपुर रोड के आसपास, शहर के भीतरी इलाकों में आसपास के गांव में ऐसे कई बिना डिग्री के डॉक्टर अपनी प्रेक्टिस कर रहे हैं और ड्रग विभाग में सभी अधिकारियों को जानते हैं गरीब मरीजों की जान को खतरा नीम हकीमो द्वारा लोगों का उपचार करने में सदैव लोगों की जान का खतरा बना रहता है अगर कोई बात बाहर नहीं आती तो आए दिन कई लोग इसे उपचार करा कर उल्टा अपना राग बढ़ा लेते हैं पर फिर उन्हें इलाज के लिए बड़े अस्पतालों की और जाना पड़ता है हर बीमारी का कर देते हैं इलाज ऐसे डॉक्टर दाद, खाज, खुजली से लेकर डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, जोड़ों का दर्द, सर्दी बुखार के अलावा पेट की हर तरह की बीमारियों का इलाज करते हैं और ऐसे केसों में हाथ डाल देते हैं जिनमें कोई छोटा-मोटा अस्पताल हाथ नहीं डालता नीम हकीमी के क्लिनिको पर डेथ रेट कितनी स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है ऐसा कोई रिकॉर्ड इनके क्लिनिको पर मरीजों की डेथ रेट कितनी है स्वास्थ्य विभाग ने कभी नोटिस नहीं किया और ना ही कभी सर्वे कराया है अधिकारियों के अलावा उच्च अधिकारियों को भी ऐसे क्लिनिको की खबर है कई इलाकों में तो मरीज को इन क्लिनिको में ही दाखिल कर लिया जाता है। एक व्यक्ति ने बताया कि ड्रग विभाग के अधिकारी उसके संपर्क में है मे कोई मुश्किल होने पर उन्हें फोन कर लेता है नीम हकीम पकड़ना तो दूर दवाइयां के सैंपल फेल होने पर नहीं करते जांच एक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि ड्रग विभाग अलग कर देने के बाद अधिकारियों की हालत पहले से खराब हो गई है नीम हकीमो को पकड़ना तो दूर यह तो नियमित तौर पर दवाइयो की रेगुलर जांच भी नहीं करते बावजूद इसके की हिमाचल में 48 दवाइयो के सैंपल फेल हो चुके हैं और आशंका व्यक्त की जाती है कि वह दवाइयां लुधियाना में बड़े आराम से बिक जाती है क्योंकि स्थानीय डर की विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता हिमाचल के ड्रग विभाग में जहां अलर्ट जारी किया है वहां स्थानीय अधिकारी अभी एयर कंडीशन रूम से बाहर नहीं निकल पाए हैं। क्लीनिक पर बेचते हैं हर तरह की दवाइयां ड्रग विभाग की पीठ थपथपाए बिना डिग्री के डॉक्टर अपने क्लीनिक में हर तरह की दवाई रखते हैं जिनमें एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेदिक दवाइयां भी शामिल है अब इन्हें कोई भी पकड़ सकता है चाहे वह एलोपैथी विभाग का हो आयुर्वेदिक विभाग का हो या होम्योपैथिक विभाग का हो परंतु सबसे अधिक भागीदारी एलोपैथी दवाइयो का काम देखने वालों की है। जो सबसे कम ऐसे मामलों की ओर ध्यान देते हैं लोगों में यह चर्चा आम पाई जाती है कि बिना ड्रग विभाग के ऐसे डॉक्टर जिनकी शहर में संख्या सैकड़ो में हो काम नहीं कर सकते जब तक की ड्रग विभाग के अधिकारियों की भागीदारी न हो। इस सिलसिले में जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी की टिप्पणी जानने के लिए संपर्क नहीं हो पाया.