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Bhopal: ​मध्य प्रदेश में ग्रामीण क्रांति: 1800 करोड़ का सड़क जाल और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय - Uturn Time
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"1800 करोड़ की परियोजना से बदलेगा गांवों का चेहरा"
(पवन वर्मा-विनायक फीचर्स) भारत की आत्मा गाँवों में बसती है और किसी भी राज्य की समग्र प्रगति तब तक सुनिश्चित नहीं की जा सकती, जब तक कि उसके ग्रामीण अंचल मुख्यधारा से न जुड़ें। मध्य प्रदेश, जो देश का हृदय स्थल है, वर्तमान में एक ऐसी ही बुनियादी ढांचागत क्रांति का साक्षी बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व और केंद्र सरकार के सशक्त समन्वय से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की तकदीर बदलने के लिए 1800 करोड़ रुपये से अधिक की नई सड़क परियोजनाओं का शंखनाद किया गया है। यह निवेश केवल डामर और गिट्टी का बिछना मात्र नहीं है, यह उन लाखों ग्रामीणों के सपनों को नई उड़ान देने का सशक्त जरिया है, जो दशकों से बारहमासी सड़कों की प्रतीक्षा कर रहे थे। ​विकास की इस नई इबारत को हाल ही में एक भव्य स्वरूप तब मिला, जब केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लोकसभा क्षेत्र के भैरूंदा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस आयोजन ने न केवल विकास कार्यों को गति दी, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि डबल इंजन की सरकार ग्रामीण उत्थान के लिए कितनी संकल्पित है। भैरूंदा की धरा से शुरू हुआ यह सड़क जाल प्रदेश के सुदूर वनांचलों, आदिवासी क्षेत्रों और सीमावर्ती गाँवों तक विकास की नई रोशनी पहुँचाने के लिए तैयार है। ​कनेक्टिविटी का नया युग: पीएमजीएसवाय-4 और पीएम जन-मन ​प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) के चौथे चरण के अंतर्गत मध्य प्रदेश को 1763 करोड़ रुपये की लागत वाली 2117 किलोमीटर लंबी सड़कों की स्वीकृति मिली है। यह विशाल नेटवर्क राज्य के उन हिस्सों को कवर करेगा जहाँ अब भी आधुनिक कनेक्टिविटी का अभाव था। इन नई सड़कों के माध्यम से लगभग 987 ग्रामीण बसाहटें पहली बार मुख्य सड़क मार्गों से सीधे जुड़ेंगी। यह उन क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है जहाँ बारिश के चार महीनों में आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता था। ​वहीं, जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए समर्पित 'पीएम जन-मन' अभियान के तहत 261 करोड़ रुपये की लागत से 384 किलोमीटर सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। यह केवल एक प्रशासनिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन 168 जनजातीय बहुल बसाहटों के लिए जीवन की नई किरण है, जो अब तक दुर्गम और कटे हुए माने जाते थे। इन क्षेत्रों में सड़कों का पहुँचना शासन की अन्य कल्याणकारी योजनाओं जैसे उज्ज्वला, आयुष्मान और कौशल विकास के प्रभावी क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त करेगा। ​सड़कों का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव ​ग्रामीण अंचलों में सड़क केवल रास्ता नहीं होती, वह विकास की रेखा होती है। पक्की सड़कों ने सबसे बड़ा प्रभाव शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर डाला है। अब स्कूल जाने वाले बच्चों की राह आसान हुई है, जिससे ग्रामीण साक्षरता दर में वृद्धि हो रही है। विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ स्कूल दूर हुआ करते थे, अब स्कूल बसों और छोटे वाहनों का पहुँचना सुलभ हुआ है। ​स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो आपातकालीन स्थितियाँ अब जीवन के लिए खतरा नहीं बनतीं। जननी एक्सप्रेस और 108 एम्बुलेंस अब कम समय में सुदूर गाँवों तक पहुँच रही हैं, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने में बड़ी सफलता मिल रही है। आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो बेहतर कनेक्टिविटी के कारण गाँवों में लघु और कुटीर उद्योगों को अभूतपूर्व बढ़ावा मिल रहा है। दूध, सब्जी और अन्य दैनिक उत्पादों की सप्लाई चेन मजबूत होने से ग्रामीणों की सीधी पहुँच शहरी मंडियों तक हो गई है। किसान अब अपनी फसल को खराब होने से पहले सही दाम पर बेच पा रहा है, जो 'आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश' के सपने को सच कर रहा है। ​गुणवत्ता और रखरखाव में मध्य प्रदेश का कीर्तिमान ​मध्य प्रदेश आज ग्रामीण सड़क निर्माण और उनके रखरखाव के मामले में पूरे देश में अग्रणी बनकर उभरा है। सर्वाधिक लंबाई वाली सड़कों के निर्माण में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर काबिज है। अब तक प्रदेश में 90,150 किलोमीटर सड़कों का जाल बिछाया जा चुका है, जिससे 17,540 से अधिक बसाहटें लाभान्वित हुई हैं। ​निर्माण के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी सरकार का विशेष जोर है। मध्य प्रदेश को 'गारंटी पीरियड' के बाद भी सड़कों के बेहतर रख-रखाव के लिए देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। 'वेस्ट टू वेल्थ' की अवधारणा को अपनाते हुए कई जिलों में प्लास्टिक कचरे और फ्लाई एश का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा रहा है, जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि सड़कों की उम्र भी बढ़ाता है। ​जनजातीय उत्थान: पीएम जन-मन की भूमिका ​मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष रूप से 'पीएम जन-मन' योजना पर जोर दिया है। यह योजना उन विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए है जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गयी थी। 261 करोड़ की लागत से बनने वाली ये सड़कें इन जनजातीय क्षेत्रों में न केवल परिवहन की सुविधा देंगी, बल्कि उन्हें डिजिटल इंडिया से भी जोड़ेंगी। सड़क पहुँचने के साथ ही वहाँ बिजली के खंभे और ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाना आसान हो गया है, जिससे अब इन गाँवों के युवा भी दुनिया से जुड़ सकेंगे। स्वर्णिम भविष्य की ओर कदम ​प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह और भैरूंदा जैसे आयोजनों के माध्यम से मध्य प्रदेश ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह "गाँव, गरीब और किसान" की सरकार चलाने में अग्रणी है। मुख्यमंत्री के शब्दों में, "गाँव की सड़क केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की आधार रेखा है।" जैसे-जैसे ये 2117 किलोमीटर लंबी सड़कें मध्य प्रदेश की माटी पर अपनी छाप छोड़ेंगी, वैसे-वैसे ग्रामीण अंचलों में समृद्धि, सुरक्षा और स्वावलंबन की नई फसल लहलहाएगी। यह सड़कों का जाल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रगति का वह राजमार्ग तैयार कर रहा है, जिस पर चलकर मध्य प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का पावर हाउस बनेगा। यह बुनियादी ढांचागत निवेश आने वाले समय में मध्य प्रदेश को 'विकसित भारत @ 2047' के संकल्प को सिद्ध करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। आज के ये निवेश, कल के समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश की जीवंत गवाही देंगे। (विनायक फीचर्स)