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कंपनी को नुकसान पहुंचाने पर पूर्व डीएम को लगा 3.64 लाख जुर्माना, पहले वसूला, फिर उच्च अधिकारियों ने सेटिंग करके अंदरखाते वापिस भी कर डाला - Uturn Time
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यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को अधिकारी ने ही लगा डाला लाखों का चूना हाई स्पीड पर अधिकारी, 5 दिन में नोटिस, रिप्लाई, एक्शन और जुर्माना वसूली भी कर डाली लुधियाना/यूटर्न/4 फरवरी। आज कल ज्यादातर सरकारी विभागों में अंदरखाते अधिकारियों द्वारा सेटिंगें करके बड़े से बड़े मामले को अंजाम दे दिया जाता है। जिसमें चाहें केंद्र और चाहे राज्य सरकार का विभाग हो, लेकिन ज्यादातर में आपसी मिलीभगत के चलते अधिकारी सरकारों को सीधे व असीधे तौर पर बड़े सत्र पर चूना लगाने में जुटे हैं। वहीं अब एक ताजा मामला यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का सामने आया है। बेशक यह कंपनी केंद्र सरकार के अधीन है, लेकिन इस कंपनी में भी अधिकारियों पर लाखों रुपए का कंपनी को चूना लगाने के आरोप लगे हैं। जिसकी बकायदा शिकायत भी उच्च अधिकारियों से की गई है। दरअसल, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के लुधियाना डिवीजन मैनेजर रहे अरुण कालिया पर ऑफिस बदलने के दौरान कंपनी को 3.64 लाख रुपए का नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे। कंपनी के चेयरमैन द्वारा यह जुर्माना लगाया गया। उक्त जुर्माना राशि की रिकवरी भी कर डाली। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि पहले कंपनी ने रिकवरी की और फिर साढ़े तीन साल के दौरान आधे-आधे करके पेमेंट वापिस भी कर दी। जिसमें यह दावा किया कि कंपनी ने गलती से जुर्माना लगा दिया था। अब इसे पूर्व अधिकारियों के साथ कंपनी के कई मौजूदा अधिकारियों का प्यार व सम्मान समझें या मिलीभगत, अब यह तो जनता ही बता सकती है। लेकिन चर्चाएं हैं कि इस पूरे खेल में कुछ अधिकारियों को हिस्सा भी मिला है। अब देखना होगा कि मौजूदा चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर इस जुर्माने को वसूल पाते हैं या नहीं। ऑफिस शिफ्टिंग के दौरान किया नुकसान दरअसल, यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी का 2017 से पहले डिवीजनल ऑफिस मॉल रोड पर था। जहां पर करीब 35-3600 स्केयरफीट जगह रेंट पर लेकर 60 हजार रुपए प्रति महीना किराया दिया जाता था। लेकिन 2017 में कंपनी ऑफिस जबरन पक्खोवाल रोड पर शिफ्ट किया। जहां 1803 स्केयरफीट जगह बताकर 1.27 लाख 652 रुपए प्रति महीना किराया फिक्स किया गया। मगर जब जांच हुई तो कंपनी द्वारा बुलाए आर्किटेक्ट ने उक्त जमीन चैक की। जिससे पता चला कि रेंट एरिया 1588 स्केयरफीट है। जबकि किराया 1803 स्केयरफीट के हिसाब से लिया गया। जब डिवीजन मैनेजर अरुण कालिया थे। चर्चा है कि रेंट पर जमीन लेते हुए उनके भी हस्ताक्षर हुए। जिन पर आरोप है कि उन्होंने इसका ध्यान रखना था। फिर कंपनी ने यह जुर्माना लगाया। उच्च अधिकारियों ने लगाया जुर्माना, खुद ही वापिस भी किया इस मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दरअसल, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर सबसे प्रमुख होता है। यह जुर्माना भी पूर्व चेयरमैन गिरीश राधाकृष्ण द्वारा जांच के बाद लगाया था। जिसके बाद डीएम अरुण कालिया द्वारा शिकायत दी जाती है। जुर्माना वसुलने के ढ़ाई साल बाद कमेटी बैठती हैं। जिसके बाद 2023 में जनरल मैनेजर राधिका और फिर 2024 में जनरल मैनेजर कालावेनी सुभाह के दो ऑर्डर सामने आते हैं। पहले ऑर्डर में कमेटी द्वारा 50 प्रतिशत पेमेंट कालिया को वापिस करने और फिर दूसरे ऑर्डर में बाकी की वसूल की पेमेंट वापिस करने का लिखा होता है। इसमें चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस कमेटी में भी चेयरमैन व जीएम समेत कई उच्च अधिकारी कमेटी में शामिल होते हैं। उन्हीं अधिकारियों ने पहले जुर्माना लगा वसूल किया और फिर खुद ही वापिस कर दिया। जिसके चलते चर्चाएं हैं कि इस पूरे खेल में बड़ा हेरफेर किया गया है। जांच एजेंसियां इन्वेस्टिगेशन करे तो और मामलों के हो सकते खुलासे वहीं चर्चा है कि यह तो अभी एक शहर की एक डिवीजन का मामला सामने आया है। जबकि कंपनी के पास पूरे देश में सैकड़ों डिवीजन हैं। ऐसे में चर्चा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों को सभी डिवीजनों की इन्वेस्टिगेशन करनी चाहिए। जिससे कई और बड़े घोटाले खुलकर सामने आ सकते हैं। क्योंकि अधिकारियों द्वारा इस तरह करके कंपनी के साथ साथ सरकारी खजाने को भी चूना लगाया जा रहा है। दरअसल, कंपनियां नुकसान में जाने का सबसे बड़ा कारण कुछ भ्रष्ट अधिकारी ही हैं। सुपर फास्ट काम करने का अधिकारियों को मिलना चाहिए खिताब दरअसल, इस पूरी कार्रवाई की डिटेल तैयार हुई। जो आरटीआई के जरिए मिली। जिस मुताबिक पूर्व डीएम अरुण कालिया की मई 2021 में रिटायरमेंट थी। तब चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर रहे गिरीश राधाकृष्ण द्वारा इस रिटायरमेंट से 10 दिन पहले यानि कि 21 मई 2021 को तब के डीएम अरुण कालिया को चार्जशीट किया और एक नोटिस निकालकर उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए कहा। यह कार्रवाई इतनी गोपनीय होती है कि जल्दी में इसके दस्तावेज बाहर नहीं निकाले जाते। चार्जशीट कर मदसार हेड ऑफिस में बैठे चेयरमैन ने नोटिस निकाला। अब पार्सल जाते और रिप्लाई आते समय लगता है। लेकिन आरटीआई में आए दस्तावेजों के मुताबिक 24 मई को पूर्व डीएम कालिया ने रिप्लाई भी दे दिया। जबकि 25 मई को चेयरमैन ने फैसला करते हुए 3.64 लाख जुर्माना लगाकर वसूली भी कर ली। यानि कि 5 दिन में पूरी कार्रवाई खत्म कर डाली। जिससे लगता है कि शायद चेयरमैन और डीएम या तो इकट्ठे बैठकर काम कर रहे थे या पहले से पूरा मामला फिक्स था। चर्चा है कि कंपनी के अधिकारी अगर इतनी तेजी से काम करते हैं तो उन्हें खिताब देकर सम्मानित जरुर करना चाहिए। अपने गले से सांप निकाल दूसरे के गले में फेंका वहीं चर्चा है कि अरुण कालिया द्वारा अपने ऊपर लगे आरोप सिरे से हटाकर अधिकारियों के जरिए अब जमीन मालिक के सिर जड़ दिए हैं। यानि कि कमेटी ने यह फैसला किया कि इस मामले में गलती रेंट पर जमीन देने वाले मालिक की है। जबकि हैरानी की बात तो यह है कि अगर रेंट पर जमीन देने वाला व्यक्ति अपनी जमीन को 5000 गज बताएगा, तो क्या वहीं समझकर उसे किराया दे दिया जाएगा। जिससे साफ जाहिर है कि मामले को घूमाकर कंपनी को उलझाने का प्रयास है। आखिर किस तरह अधिकारियों द्वारा पब्लिक मनी को जमकर उड़ाया जा रहा है। जबकि मौजूदा चेयरमैन से लेकर चीफ रीजनल मैनेजर द्वारा मामले की तरफ कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा। चीफ रीजनल मैनेजर बचाव करते आए नजर इस मामले में कंपनी की चीफ रीजनल मैनेजर संगीता बाली से संपर्क करके मामले संबंधी पूछा गया। लेकिन उन्होंने पूरा मामला सुनने के बाद बिना कुछ कहे ही फोन काट दिया और दोबारा फोन ही नहीं उठाया। मेरे ध्यान में नहीं है मामला वहीं मौजूदा डिवीजन मैनेजर ध्रुव तिवारी का कहना है कि ऐसे मामलों संबंधी उनके हेड ऑफिस और क्षेत्रीय रीजनल ऑफिस द्वारा ही डील किया जाता है। डिवीजनल ऑफिस का इसमें लेनदेन नहीं होता। मेरा कोई लेनदेन नहीं, गलती से कटे थे पैसे वहीं पूर्व डीएम अरुण कालिया का कहना है कि मामले में मेरा कोई लेनदेन नहीं है। बिल्डिंग सेंशनिंग और अप्रूवल कमेटी द्वारा दी जाती है। डीएम तो सिर्फ काम करता है, उसका इसमें रोल न होने पर उससे पूछना जरुरी नहीं होता। अब जिसने सेंशनिंग की है, वह इसे देखें। कंपनी ने गलती से मेरे पैसे काटे थे, वह वापिस कर दिए हैं। ---