विधानसभा चुनाव से पहले हाईकमान संगठन को एकजुट करने में जुटा, चुनाव समिति की बैठक में चारों कमेटियों की जिम्मेदारियां तय होने के साथ आंतरिक मतभेद सुलझाने पर रहेगा फोकस।
चंडीगढ़ (Naren Danu) : पंजाब विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू होने से पहले कांग्रेस अब संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत मंगलवार को नई दिल्ली में प्रदेश चुनाव समिति की पहली बड़ी बैठक होने जा रही है। बैठक की कमान प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल संभालेंगे, जबकि कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी इसमें मौजूद रहेंगे। पार्टी के लिए यह बैठक सिर्फ चुनावी रणनीति बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हाल के दिनों में खुलकर सामने आई गुटबाजी को खत्म करने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।
बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, चुनाव समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी, कोर कमेटी के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह रंधावा, मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह, इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला समेत सभी प्रमुख नेताओं और विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों को बुलाया गया है। हालांकि सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि चन्नी और रंधावा बैठक में शामिल होते हैं या नहीं, क्योंकि दोनों नेता पहले सार्वजनिक रूप से राजा वड़िंग के नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार बैठक में चुनावी तैयारियों की समीक्षा के साथ चारों समितियों के कामकाज की रूपरेखा तय की जाएगी। हर समिति को उसकी जिम्मेदारी सौंपने के अलावा विधानसभा चुनाव के लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर भी चर्चा होगी। संसद सत्र के चलते दिल्ली में मौजूद पंजाब के सांसद भी बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।
दरअसल, चार चुनावी समितियों के गठन के बाद पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया था। चन्नी समर्थकों ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग उठाई थी, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने साफ कर दिया कि राजा वड़िंग ही प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे। इसके बाद भले ही चन्नी ने सार्वजनिक रूप से पार्टी में सब कुछ सामान्य होने की बात कही हो, लेकिन रंधावा लगातार नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं।
ऐसे में मंगलवार की बैठक को पंजाब कांग्रेस के लिए केवल चुनावी रणनीति तय करने का मंच नहीं, बल्कि संगठन में एकजुटता का संदेश देने की बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश रहेगी कि मतभेदों को पीछे छोड़ सभी नेता एकजुट होकर विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटें और कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाए।