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हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेशों पर लगाई रोक, कहा – समबद्ध मामलों में उच्च अधिकारियों को बेवजह बुलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग - Uturn Time
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जालंधर कोर्ट द्वारा लुधियाना सीपी को नशा तस्करी केस में समन जारी करने का मामला सब हेडिंग --- हाईकोर्ट ने कहा मीडिया द्वारा अधूरी जानकारी पर खबरें चलाकर छवि खराब करना गलत लुधियाना/यूटर्न/4 फरवरी। जालंधर की ट्रायल कोर्ट द्वारा एक एनडीपीएस एक्ट के केस में लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा को बतौर डिफेंस गवाह समन जारी करके पेश होने के लिए कहा गया था। इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया है। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना ठोस कारण के वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्मेंट घसीटना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और ट्रायल में देरी करने की कोशिश है। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की बेंच ने इसे नशा विरोधी अभियानों को कमजोर करने वाला कदम बताया। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल सीसीटीवी फुटेज जैसे छोटे कारणों के लिए किसी उच्च अधिकारी को बुलाने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ अधिकारियों को बेवजह अदालतों में बुलाना समय की बर्बादी है, खासकर उन मामलों में जो समय-बद्ध हैं। अधिकारी केस की जांच का हिस्सा नहीं, ट्रायल लटकाने का उद्देश्य हाई कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जालंधर की ट्रायल कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर की उपस्थिति के लिए जमानती वारंट तक जारी कर दिए थे। बेंच के अनुसार, जो अधिकारी न तो जांच का हिस्सा थे और न ही गवाहों की सूची में शामिल थे, उन्हें केवल ट्रायल लटकाने के उद्देश्य से नहीं बुलाया जा सकता। उपस्थिति के लिए अड़े रहना गलत सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सीपी लुधियाना स्वपन शर्मा ने अपनी व्यस्तता और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारियों के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का अनुरोध किया था। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए था, लेकिन उपस्थिति पर अड़े रहना न्यायिक सूझ-बूझ के विपरीत है। मीडिया आधूरी जानकारी पर कर रहा छवि खराब हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अधूरी जानकारी और अटकलों के आधार पर खबरें चलाकर वरिष्ठ अधिकारियों की छवि खराब करने की कोशिश की गई, जो समाज और मीडिया की पारदर्शिता के लिए सही नहीं है। दरअसल, जालंधर ट्रायल कोर्ट द्वारा जब सीपी स्वपन शर्मा के समन जारी किए तो मीडिया द्वारा धड़ल्ले के साथ खबरें चला दी गई थी। जिस पर हाईकोर्ट द्वारा टिप्पणी की गई है। ---