पंजाब/यूटर्न/3 फरवरी। पंजाब के पूर्व मंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया मंगलवार को पटियाला की नाभा जेल से बाहर आ गए। उन्होंने बाहर आते ही समर्थकों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने मूंछों पर ताव दिया। समर्थकों को संबोधित करते हुए मजीठिया ने कहा- जितना सरकार ने दबाया, उतनी ताकत मिली। दिल्ली हुक्मरानों के साथ ईंट से ईंट टकरानी है। मुझे इस बात की प्रेरणा मिली है। जेल में भी मैं भगवंत मान और केजरीवाल के नाम वाले तकिए गोड्डे थल्ले रखकर सोता था। मजीठिया ने कहा- मैं दिल की गहराइयों से आप सबका, अपनी माता बहनों का, मजीठा हलके में बैठे प्रत्येक जन का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मेरे लिए अरदास की। सरकार चाहती थी कि यह मरा बाहर आए। जिंदा बाहर न आए। मान का बस चलता तो वह मुझे भी मरवा देता, जैसे सिद्धू मूसेवाला को मरवाया। समर्थकों को संबोधित करने के बाद मजीठिया पटियाला में गुरुद्वारा साहिब पहुंचे। यहां उन्होंने माथा टेका।
डेरा ब्यास प्रमुख द्वारा मजीठिया को बेगुनाह बताने पर सियासत में बवाल
सोमवार को जमानत मिलने से पहले डेरा ब्यास के मुखी बाबा गुरिंदर ढिल्लो ने जेल में मजीठिया से मुलाकात की। बाहर आकर उन्होंने मजीठिया पर दर्ज किए ड्रग्स व अन्य केस को गलत ठहरा दिया था। इसको लेकर अब सीएम भगवंत मान ने डेरा मुखी का नाम लिखे बिना सोशल मीडिया पर तंज कसा। मान ने लिखा कि कल बन जाए, भले आज बन जाएं, अदालतों का भगवान ही रखवाला, जहां मुलाकाती ही जज बन जाएं।
सीएम की पोस्ट पर भाजपा का पलटवार
सीएम की पोस्ट के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता प्रितपाल सिह बलियेवाल ने कहा- अति का खुदा से भी बैर होता है। अब आप भगवान रूपी आत्माओं की भी नुक्ताचीनी करने लगे हैं। राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुखिया बाबा गुरिंदर सिंह जी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं, लेकिन आपको कौन समझाए। डेरा की संगत और पंजाब की जनता इस अपमान का जवाब देगी।
बाबा ढिल्लों से माफी मांगे सीएम मान - सुखपाल खैहरा
कांग्रेस के सीनियर नेता और भुलत्थ के विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा डाली गई पोस्ट की कड़ी निंदा की है। खैरा ने कहा कि मान ने राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह जी को निशाना बनाने और अपमानित करने के लिए अपमानजनक और घटिया भाषा का इस्तेमाल किया, सिर्फ इसलिए कि बाबा जी ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात की थी। खैहरा ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने सिर्फ एक सामाजिक मुलाकात की वजह से एक सम्मानित आध्यात्मिक नेता को राजनीतिक कीचड़ में घसीटा। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और धार्मिक नेता अक्सर जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से मिलते हैं, और ऐसी मुलाकातों का राजनीतिकरण करना मुख्यमंत्री के पद की गरिमा पर बुरा असर डालता है।
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