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Budget 2026-27: चंडीगढ़ का बजट घटा, विकास योजनाओं पर संकट के बादल - Uturn Time
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अजीत झा. चंडीगढ़ 01 Feb । वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ को 6,545.52 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में 438 करोड़ रुपये कम है। बीते साल चंडीगढ़ को कुल 6,983.18 करोड़ रुपये मिले थे। बजट में आई इस कटौती ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। नए बजट के तहत रेवेन्यू हेड में 5,939.52 करोड़ रुपये और कैपिटल हेड में 606 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जबकि 2025-26 में रेवेन्यू मद के लिए 6,185.18 करोड़ रुपये और कैपिटल मद में 798 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। आंकड़ों से साफ है कि इस बार दोनों ही मदों में कमी की गई है, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में कटौती का सीधा असर बुनियादी ढांचे, नई विकास परियोजनाओं और नागरिक सुविधाओं पर पड़ सकता है। पहले से चल रही योजनाओं की गति प्रभावित होने के साथ-साथ नई योजनाओं को मंजूरी मिलने में भी दिक्कत आ सकती है। प्रशासनिक लापरवाही बनी बजट कटौती की वजह: मनीष तिवारी चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी ने बजट में कटौती को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि बजट में कमी का मुख्य कारण प्रशासन द्वारा आवंटित धनराशि का पूरा उपयोग न कर पाना है। सांसद के अनुसार, यह केवल वित्तीय आंकड़ों का मामला नहीं, बल्कि कमजोर प्रशासनिक कार्यप्रणाली का परिणाम है। मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ के लिए करीब 6,187 करोड़ रुपये का बजट तय किया था, लेकिन संशोधित अनुमानों के अनुसार प्रशासन वर्ष के अंत तक केवल 5,556 करोड़ रुपये ही खर्च कर सका। यानी लगभग 630 करोड़ रुपये बिना खर्च हुए रह गए। उनका कहना है कि बजट का यह अप्रयुक्त हिस्सा उन विकास कार्यों और जनहित योजनाओं का प्रतीक है, जो या तो समय पर पूरी नहीं हो सकीं या शुरू ही नहीं हो पाईं। इसी कमजोर वित्तीय निष्पादन का असर अब 2026-27 के बजट में देखने को मिला है। बुनियादी सेवाओं पर पड़ेगा असर सांसद मनीष तिवारी ने चेतावनी दी कि बजट में आई कटौती का सबसे ज्यादा असर शहरी बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक सुविधाओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और बढ़ते शहरी दबाव के बीच चंडीगढ़ को ज्यादा संसाधनों की जरूरत है, लेकिन बजट में कमी से हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति वित्तीय अनुशासन नहीं, बल्कि प्रशासनिक फोकस की कमी को दर्शाती है। यदि योजनाओं की बेहतर प्लानिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाता, तो बजट का पूरा उपयोग संभव था। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सीमित बजट के बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन विकास कार्यों और जनसुविधाओं को किस तरह प्राथमिकता देता है और बजट कटौती के असर को कैसे संतुलित करता है।