पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम (PSIEC) में औद्योगिक प्लॉटों के कथित गलत आवंटन से जुड़े धन शोधन मामले में ED की कार्रवाई के बाद पुराने जमीन मामलों की भी चर्चा तेज हो गई है। 4 से 6 अगस्त के बीच चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में 11 परिसरों पर तलाशी और PSIEC कार्यालय में सर्वे किया गया। एजेंसी के मुताबिक 12.15 लाख रुपये की कथित बेहिसाबी नकदी मिली और करीब 4.01 करोड़ रुपये बैंक खातों में रोके गए।
मोहाली : पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम (पीएसआईईसी) में औद्योगिक प्लॉटों के कथित गलत आवंटन से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ताजा कार्रवाई ने पुराने जमीन मामलों की फाइलों को भी दोबारा चर्चा में ला दिया है। प्रवर्तन निदेशालय के जालंधर क्षेत्रीय कार्यालय ने 4 से 6 अगस्त के बीच चंडीगढ़, अमृतसर, गुरदासपुर और लुधियाना में 11 परिसरों पर तलाशी ली, जबकि पीएसआईईसी कार्यालय में भी सर्वे किया गया। एजेंसी के अनुसार 12.15 लाख रुपये की कथित बेहिसाबी नकदी बरामद की गई, जबकि पूर्व मुख्य महाप्रबंधक सुरिंदर पाल सिंह और पूर्व महाप्रबंधक जसविंदर सिंह रंधावा से जुड़े बैंक खातों में करीब 4.01 करोड़ रुपये की राशि रोक दी गई।
इस कार्रवाई के बाद मोहाली के चर्चित *फिलिप्स-सिग्निफाई-गुलमोहर 25 एकड़ जमीन प्रकरण* पर भी नजरें टिक गई हैं। इसकी सबसे अहम वजह एक समान नाम है—*सुरिंदर पाल सिंह*। मौजूदा प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में उनका नाम सामने आया है, जबकि पुराने फिलिप्स जमीन मामले में भी वह पीएसआईईसी की उस समिति से जुड़े थे, जिसके सामने करीब 25 एकड़ औद्योगिक जमीन को 125 छोटे प्लॉटों में बांटने का प्रस्ताव आया था।
रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन सिग्निफाई इनोवेशंस से गुलमोहर टाउनशिप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास पहुंची और मार्च 2021 में इसके विभाजन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। बाद में पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने जनवरी 2023 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
हालांकि एक महत्वपूर्ण कानूनी तथ्य यह भी है कि *पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 20 दिसंबर 2024 को फिलिप्स-गुलमोहर से जुड़ी प्राथमिकी रद्द कर दी थी।* अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कहा था कि जमीन का विभाजन वर्ष 2005 की लागू नीति के तहत किया गया था और समिति सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मंशा स्थापित नहीं होती। इसलिए पुराने मामले को सिद्ध घोटाला कहना उचित नहीं होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रवर्तन निदेशालय को मिले दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड क्या केवल मौजूदा प्लॉट आवंटन मामले तक सीमित रहेंगे या जांच एजेंसी पीएसआईईसी के पुराने आवंटन, हस्तांतरण और जमीन विभाजन मामलों की भी परतें खोलेगी। *दोनों मामलों में सुरिंदर पाल सिंह का नाम आने से फिलिप्स की 25 एकड़ जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड तक जांच पहुंचने की संभावना जरूर बनती है।* हालांकि फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय ने फिलिप्स, सिग्निफाई इनोवेशंस या गुलमोहर टाउनशिप का नाम अपनी मौजूदा कार्रवाई में आधिकारिक रूप से नहीं लिया है।