एयरपोर्ट संचालकों की एयरलाइंस में हिस्सेदारी सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव, कैबिनेट की मंजूरी जरूरी
नई दिल्ली 23 July : देश के विमानन क्षेत्र में जल्द एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अदाणी समूह ने सरकार से उस नियम में ढील देने का अनुरोध किया है, जिसके तहत एयरपोर्ट संचालक किसी शेड्यूल्ड एयरलाइन कंपनी में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकते। नियमों में बदलाव होने पर अदाणी समूह के लिए अपनी एयरलाइन शुरू करने का रास्ता साफ हो सकता है।
मौजूदा समय में भारत के घरेलू विमानन बाजार पर इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा है। दोनों कंपनियां मिलकर देश के घरेलू यात्री यातायात के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करती हैं। ऐसे में किसी नए बड़े कारोबारी समूह के विमानन क्षेत्र में उतरने से प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और यात्रियों को नए विकल्प मिल सकते हैं।
एयरपोर्ट संचालकों की एयरलाइंस में हिस्सेदारी को सीमित करने वाला नियम वर्ष 2006 में दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के निजीकरण के दौरान लागू किया गया था। इसके अनुसार इन एयरपोर्ट के संचालक किसी शेड्यूल्ड एयरलाइन में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं ले सकते। इस नियम का उद्देश्य एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच हितों के टकराव को रोकना था।
अदाणी समूह वर्तमान में देश के कई प्रमुख एयरपोर्ट का संचालन करता है। यदि सरकार उसकी मांग स्वीकार करती है, तो इसके लिए कानूनी मंजूरी के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति भी आवश्यक होगी। नियमों में बदलाव केवल अदाणी समूह ही नहीं, बल्कि अन्य एयरपोर्ट संचालकों के लिए भी विमानन कारोबार में प्रवेश का रास्ता खोल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई एयरलाइन के आने से टिकट कीमतों, हवाई मार्गों और यात्री सेवाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। हालांकि, सरकार को नियम बदलने से पहले निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, एयरपोर्ट स्लॉट आवंटन और हितों के टकराव जैसे मुद्दों पर भी विचार करना होगा।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है। फिलहाल इस संबंध में सरकार की अंतिम मंजूरी और अदाणी समूह की औपचारिक एयरलाइन योजना का इंतजार है।