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Chandigarh: चन्नी की ताकत दिखाने की कोशिश पर भी नहीं झुका हाईकमान, कांग्रेस में वड़िंग पर कायम भरोसा - Uturn Time
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2022 की चुनावी हार और उसके बाद की परिस्थितियों को माना जा रहा अहम कारण; राहुल गांधी-खड़गे आज पंजाब नेतृत्व पर कर सकते हैं मंथन
चंडीगढ़ (Naren Danu) : पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जारी खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के शक्ति प्रदर्शन का असर फिलहाल पार्टी हाईकमान पर दिखाई नहीं दे रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चन्नी समर्थक सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं का समर्थन मिलने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने के पक्ष में नहीं है। सूत्रों का कहना है कि हाईकमान के फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव और उसके बाद की परिस्थितियां हैं। कांग्रेस उस चुनाव में महज 18 सीटों तक सिमट गई थी, जबकि मुख्यमंत्री चेहरा रहे चरणजीत सिंह चन्नी अपनी दोनों सीटों से चुनाव हार गए थे। चुनाव परिणाम के बाद संगठन के कठिन दौर में चन्नी के लंबे समय तक विदेश में रहने को भी पार्टी नेतृत्व गंभीरता से देख रहा है। इधर, विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक विवाद खत्म करने के प्रयास तेज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के साथ बैठक कर मौजूदा हालात पर चर्चा कर सकते हैं। वहीं, चन्नी जालंधर में यूथ कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे। पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राजा वड़िंग ने विपक्ष में रहते हुए संगठन को सक्रिय बनाए रखा। वर्ष 2022 की हार के बाद जब प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था, तब वड़िंग ने संगठन की कमान संभाली। पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने जिला स्तर पर संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया, जिसे हाईकमान सकारात्मक रूप से देख रहा है। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की हालिया रिपोर्ट भी वड़िंग के पक्ष में मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में अधिकांश जिला कांग्रेस अध्यक्षों का समर्थन वड़िंग के साथ होने का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि पार्टी नेतृत्व बदलाव के बजाय एकजुट होकर चुनाव की तैयारी पर जोर देना चाहता है। दूसरी ओर, चन्नी समर्थक राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना पक्ष सीधे रखने की कोशिश में हैं। उनका मानना है कि पंजाब की मौजूदा स्थिति पर उनका पक्ष भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल संगठन में बड़े बदलाव से बचना चाहता है। उनका मानना है कि चुनाव से कुछ महीने पहले नेतृत्व परिवर्तन का संदेश पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, चन्नी का पंजाब की राजनीति में अपना जनाधार है और यदि असंतोष लंबा खिंचता है तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।