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Chandigarh: दिल्ली तक पहुंचेगी पंजाब कांग्रेस की कलह! चन्नी खेमे ने राहुल गांधी से सीधी मुलाकात की बनाई रणनीति - Uturn Time
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राजा वड़िंग को हटाने की मांग पर अड़ा गुट, हाईकमान पर दबाव बनाने के लिए दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
चंडीगढ़ (Naren Danu) : पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने की ओर बढ़ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाले गुट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ तो दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के सामने शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। चन्नी समर्थकों का मुख्य आग्रह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाकर संगठन में व्यापक बदलाव करने का है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुई हालिया बैठक के बाद भी चन्नी गुट संतुष्ट नहीं है। बघेल ने नेताओं की बात सुनने के बाद यह स्पष्ट किया कि फिलहाल संगठनात्मक फैसलों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा, हालांकि उन्होंने नेताओं की राय कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाने का भरोसा दिया है। इसके बावजूद चन्नी खेमा अब सीधे राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखने की तैयारी में जुट गया है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने के बाद चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, ओपी सोनी और परगट सिंह समेत कई वरिष्ठ नेता दिल्ली में उनसे मुलाकात करने का प्रयास कर रहे हैं। चन्नी गुट का दावा है कि उनके साथ प्रदेश के 90 से अधिक विधानसभा हलकों के मौजूदा और पूर्व विधायक, चुनाव लड़ चुके नेता तथा कई वरिष्ठ पदाधिकारी खड़े हैं। उनका कहना है कि पार्टी की जमीनी स्थिति और कार्यकर्ताओं की नाराजगी से हाईकमान को सीधे अवगत कराया जाएगा। चन्नी समर्थकों का आरोप है कि पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल का हालिया दौरा पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रहा और उन्होंने मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के समर्थकों से ही मुलाकात की। इसी कारण चन्नी गुट चाहता है कि बघेल की रिपोर्ट राहुल गांधी तक पहुंचने से पहले वे स्वयं अपनी बात शीर्ष नेतृत्व के सामने रखें, ताकि संगठन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को समय रहते नहीं संभाला गया तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को संगठनात्मक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पंजाब कांग्रेस पहले भी गुटबाजी का खामियाजा भुगत चुकी है। वर्ष 2021 में नवजोत सिंह सिद्धू और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीच विवाद के बाद नेतृत्व परिवर्तन हुआ था और चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था। उससे पहले भी विभिन्न गुटों के टकराव ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित किया था। उधर, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पार्टी के विस्तार के लिए लगातार काम किया है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला आसान नहीं होगा। अब निगाहें कांग्रेस हाईकमान पर टिकी हैं कि वह चन्नी गुट के दबाव को कितना महत्व देता है और पंजाब कांग्रेस की एकजुटता बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाता है। 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए यह संगठनात्मक चुनौती बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।