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Chandigarh: पंजाब कांग्रेस में नहीं थम रही कलह, रंधावा ने हाईकमान से पूछा- 4 बैठकों के बाद भी डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं? - Uturn Time
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चन्नी-वड़िंग विवाद गहराया, राहुल गांधी की वापसी के बाद सुलह की कोशिशें तेज; भूपेश बघेल के चंडीगढ़ आने की संभावना
चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच शुरू आ नेतृत्व विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पंजाब कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार मतभेद बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस आज भी लोगों की पसंद है, इसलिए मौजूदा नेतृत्व को हालात पर गंभीरता से मंथन करना चाहिए। हाईकमान पर रंधावा के तीखे सवाल एक इंटरव्यू में रंधावा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर पार्टी नेतृत्व को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई दौर की बैठकों और बड़ी संख्या में पदाधिकारियों के बावजूद संगठन में विवाद लगातार बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि पहले कांग्रेस में सीमित संख्या में महासचिव होते थे, लेकिन संगठन प्रभावी ढंग से चलता था। अब वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी हो रही है, जिसके कारण असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। ऑब्जर्वर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब के लिए ऑब्जर्वर टीम गठित की थी। इसके बाद दिल्ली में कई दौर की बैठकों में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से संगठन और नेतृत्व को लेकर फीडबैक लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी नेताओं को भरोसा दिया गया है कि राहुल गांधी के 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद उनकी मुलाकात करवाई जाएगी, जिसमें पंजाब कांग्रेस के मौजूदा हालात पर चर्चा होगी। चन्नी ने दिखाए सख्त तेवर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को उन्होंने मोरिंडा स्थित अपने आवास पर 50 से अधिक नेताओं की बैठक कर संगठनात्मक फैसले पर असहमति जताई। चन्नी समर्थकों का कहना है कि एक सप्ताह के भीतर वे कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात कर अपना पक्ष रखेंगे। राजनीतिक हलकों में इसे हाईकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। भूपेश बघेल सक्रिय, सुलह की कोशिशें शुरू पार्टी के भीतर बढ़ते विवाद को देखते हुए पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह जल्द ही चंडीगढ़ पहुंचकर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और चरणजीत सिंह चन्नी से अलग-अलग मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा पंजाब मामलों के सह-प्रभारी सूरज ठाकुर के भी चंडीगढ़ पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, ताकि दोनों गुटों के बीच संवाद स्थापित कर विवाद को शांत किया जा सके। वड़िंग बनाम चन्नी की लड़ाई पर नजर प्रदेश कांग्रेस में अब राजा वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच खींचतान खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के भीतर कई नेता इसे कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच हुए पुराने टकराव जैसी स्थिति मान रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के अंदर यह भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में घोषित संगठनात्मक फैसलों में बदलाव की संभावना बेहद कम है। ऐसे में पार्टी की प्राथमिकता मौजूदा नेतृत्व के साथ ही नाराज नेताओं को साधकर विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की होगी। 7 जुलाई के बाद हाईकमान की नजर पंजाब पर सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के विदेश दौरे से लौटने के बाद पंजाब कांग्रेस के हालात की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद हाईकमान वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय कर सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस नेतृत्व बढ़ती गुटबाजी को कितना नियंत्रित कर पाता है और इसका 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर क्या असर पड़ता है।