चंडीगढ़/यूटर्न/3 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जल्द ही फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले हफ्तों में केंद्रीय कैबिनेट और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठनात्मक ढांचे, दोनों में बदलाव हो सकते हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में उम्मीद है कि यह प्रक्रिया संसद के मॉनसून सत्र से पहले या उसके आसपास पूरी की जाएगी। इस संभावित बदलाव से कई राजनीतिक मकसद पूरे होने की उम्मीद है, जैसे क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाना, संगठन में अच्छा काम करने वालों को इनाम देना, सहयोगियों और हाल ही में पार्टी में शामिल हुए नेताओं को जगह देना, और 2027 में कई राज्यों में होने वाले अहम विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा को मजबूत करना।
चुघ और चड्ढा के नामों पर चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और हाल ही में पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा शामिल हैं, जिन्हें कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हालांकि दोनों पार्टियों की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है, लेकिन अटकलें हैं कि चुघ को केंद्र सरकार में बड़ी भूमिका के लिए चुना जा सकता है, जबकि चड्ढा का नाम भी संभावित मंत्री पद के लिए लिया जा रहा है, अगर केंद्र सरकार अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने का फैसला करती है। कैबिनेट में फेरबदल भी होगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पर सभी की नजरें
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पर भी सबकी नजरें हैं, जिनके अपनी नई संगठनात्मक टीम की घोषणा करने की उम्मीद है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि BJP और मोदी सरकार के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए सरकार और संगठन में एक साथ बदलाव किए जा सकते हैं।
अटकलों को मिली हवा
कई घटनाओं ने इन अटकलों को और हवा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ अलग-अलग बैठकें कीं; ऐसी बैठकें अक्सर बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक फैसलों से पहले होती हैं। हालांकि BJP नेताओं ने इन बैठकों को सामान्य बताया है, लेकिन इनसे कैबिनेट में संभावित फेरबदल की चर्चा और तेज हो गई है।
कई मंत्रियों के भविष्य पर चर्चा
राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे से भी एक पद खाली हो गया है, जबकि उन मंत्रियों के भविष्य पर भी चर्चा चल रही है जिनका संसदीय कार्यकाल खत्म हो गया है या जिनकी संगठनात्मक जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2027 में विधानसभा चुनावों का सामना करने वाले राज्यों के नेताओं को कैबिनेट और भाजपा संगठन, दोनों में ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।
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