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खाली मंत्री पद, प्रदर्शन समीक्षा और चुनावी राज्यों के समीकरण बन सकते हैं विस्तार की वजह; आधिकारिक घोषणा का इंतजार
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने तीसरे कार्यकाल में पहली बार कैबिनेट का विस्तार करते हुए कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव कर सकते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने हाल ही में केंद्रीय सचिवों के साथ बैठक कर विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की। इस बैठक में विभागों की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। इसे संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्तमान में केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री सहित 72 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं। इस लिहाज से नौ मंत्री पद पहले से खाली हैं। इसके अलावा कुछ मंत्रियों के इस्तीफे और अन्य राजनीतिक कारणों से भी नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आगामी संसद के मानसून सत्र से पहले या प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा से लौटने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित फेरबदल में मंत्रियों के प्रदर्शन, विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन तथा अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखा जा सकता है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, पंजाब, गोवा, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों को प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार हो सकता है। साथ ही सहयोगी दलों के प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चाएं हैं। एनडीए के सहयोगी दलों और बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच कुछ नए नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि, इन दावों पर अभी तक सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है तो उसमें प्रशासनिक प्रदर्शन, सुशासन, सामाजिक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति जैसे कारकों को प्रमुखता मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजरें प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हैं।