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गरीब लोगों के पुनर्वास के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग
पानीपत (निर्मल सिंह विर्क) : गांव ददलाना निवासी सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग , भारत सरकार नई दिल्ली को पत्र भेजकर हरियाणा में जोहड़ों के किनारे गुजर बसर करने वाले लाखों ग़रीब परिवारों के हकों के लिए आवाज उठाई है। दीपक शर्मा ने गुहार में वर्णित किया है कि राज्य के लाखों गरीब परिवार हरियाणा के अनेक गांवों में बसते हैं । जिसमें अलग-अलग श्रेणी लोग रहते हैं, जैसे मजदूर, दलित, दिव्यांग, विधवा, वरिष्ठ नागरिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवार पिछले 30 से 60 वर्षों से जोहड़ों के किनारे रह रहे हैं। इन परिवारों ने अपनी मेहनत से छोटे-छोटे मकान बनाकर जीवन बसाया है, लेकिन अब सरकार उन्हें बेदखल करने का काम कर रही है। या किए जाने की आशंका बनी हुई है। बिना वैकल्पिक पुनर्वास के किसी भी गरीब परिवार को बेघर न किया जाए। साथ ही लंबे समय से बसे पात्र परिवारों के लिए नियमितीकरण, पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की नीति बनाई जाए, ताकि किसी भी गरीब परिवार के सम्मानपूर्वक जीवन जीने का हक मिल सके । और मानव अधिकारों का हनन भी न हो। यदि राज्य सरकार पुनर्वास के बिना इन परिवारों को हटाया जाता है , तो यह संविधान प्रदत्त जीवन, आवास और मानव गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन होगा। विशेष रूप से दलित, दिव्यांग, विधवा, वरिष्ठ नागरिक और बेसहारा परिवारों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। दीपक शर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से हरियाणा सरकार से इस पूरे मामले में रिपोर्ट तलब करने, बेदखली पर रोक लगाने और गरीब परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस नीति बनाने के निर्देश जारी करने की अपील की है। क्योंकि यह मामला मानवाधिकारों और गरीब परिवारों के पुनर्वास से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे से जुड़ा हुआ है । और गरीब लोगों का आवास उपलब्ध करवाना भी सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है। ऐसे में लोगों को बेघर करना न्याय संगत नहीं होगा। ग्रामीण क्षेत्र में गरीब लोग डर के साये में जी रहे हैं, जिस पर आयोग के रुख पर प्रदेशभर के लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।