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​"यह 'पावर सरप्लस' नहीं, बल्कि 'प्रोपगैंडा सरप्लस' सरकार है-जिला प्रधान डॉ. शर्मा
जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : धान के सीजन में पंजाब के अन्नदाता इन दिनों बिजली की भीषण किल्लत से दो-चार हो रहे हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार राज्य को 'पावर सरप्लस' (बिजली अधिशेष) होने का ढिंढोरा पीट रही है, तो दूसरी तरफ धरातल पर सच्चाई यह है कि किसान अपनी फसलों को पानी देने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। 8 घंटे निर्बाध बिजली का वादा मात्र कागजी साबित हो रहा है, जिसके चलते सूबे के कई हिस्सों में किसान सड़कों पर उतर आए हैं और बिजली ग्रिडों का घेराव कर रहे हैं। ​ 'प्रोपैगेंडा सरप्लस' सरकार: भाजपा: भाजपा के जिला प्रधान डॉ. राजिंदर शर्मा ने भगवंत मान सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे 'प्रोपैगेंडा सरप्लस' सरकार करार दिया है। उन्होंने कहा, "मजीठा, संगरूर, पटियाला और बठिंडा जैसे इलाकों में मची हाहाकार सरकार के झूठ का कच्चा चिट्ठा खोल रही है।" आंकड़ों के अनुसार, धान के सीजन के दौरान बिजली की मांग 16,000 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, लेकिन सरकार के पास पर्याप्त इंतजाम न होने से सूबे के करीब 14 लाख ट्यूबवेल सूखे पड़े हैं। ​ खेतों में आर्थिक मार, सड़कों पर गुस्सा: बिजली न मिलने के कारण किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए महंगा डीजल फूंककर जनरेटर चलाने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत बेतहाशा बढ़ गई है। भाजपा ने स्पष्ट किया कि थर्मल प्लांटों की बदइंतजामी और तकनीकी खामियों के चलते यह संकट और गहरा गया है। डॉ. शर्मा ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर तपते खेतों में जाकर देखें, जहां किसान बबार्दी की कगार पर खड़ा है। साफ है, अगर जल्द ही स्थिति न सुधरी, तो यह 'बिजली का संकट' सरकार के लिए 'सियासी संकट' में बदल सकता है।