शहर के कांग्रेसी लीडर कहने को एकजुट, लेकिन अंदरखाते गुट्टबाजी जारी
लुधियाना/यूटर्न/30 जून। कांग्रेस पार्टी की और से केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली गई है। उनकी तरफ से शिक्षा बचाओ-भविषय बचाओ के नारे तले यह विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। पूरे देश में इस विरोध के तहत प्रैस कांफ्रेस होंगी और रैलियां निकाली जाएंगी। राहुल गांधी के ऐलान के बाद मंगलवार को लुधियाना में भी कांग्रेसी लीडरों द्वारा प्रैस कांफ्रेस आयोजित की गई। इस दौरान कैप्टन संदीप सिंह संधू, पूर्व विधायक व जिला प्रधान संजय तलवार, पूर्व विधायक सुरिंदर डावर, कुलदीप सिंह वैद, मलकीत सिंह दाखा, केके बावा, बलविंदर बैंस समेत कई लीडर शामिल थे। जिनकी और से राहुल गांधी की एक वीडियो दिखाई गई। जिसके बाद देश में खराब शिक्षा नीति खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया। इस प्रैस कांग्रेस में बेशक कांग्रेस के ज्यादातर लीडर शामिल थे। लेकिन पूर्व मंत्री व दिग्गज नेता भारत भूषण आशु फिर शामिल नहीं हुए। जिसे देख चर्चाएं छिड़ गई कि शायद पार्टी के अंदर अभी भी लीडरों में आपसी मनमुटाव जारी है।
पॉलिसी बनाओ और संबंधित मंत्रियों से इस्तीफा लो
इस दौरान कांग्रेसी लीडर कैप्टन संदीप संधू ने कहा कि देश में शिक्षा का सत्र लगातार नीचे गिरता जा रहा है। कहीं पेपर लीक हो रहे हैं तो कहीं बच्चों को पढ़ाई नहीं मिल पा रही। कांग्रेस हाईकमान द्वारा शिक्षा की गलत नीति खिलाफ विरोध शुरु किया गया है। जिसके चलते अब यह विरोध प्रदर्शन पूरे देश में होगा। इसमें पहले प्रैस कांफ्रेस की जाएगी और फिर पांच रैलियां निकाली जाएगी। जिसके बाद दिल्ली कूच किया जाएगा। संदीप संधू ने कहा कि उनकी मांग है कि शिक्षा पॉलिसी में सुधार किया जाए और लापरवाही करने वाले मंत्रियों से इस्तीफा लिया जाए। उन्होंने कहा कि जब से केंद्र में भाजपा सरकार आई है, तब से देश तरक्की के रास्ते से साइड हो चुका है।
क्या अभी भी चल रही गुट्टबाजी ?
इस प्रैस कांफ्रेस में जहां शहर के ज्यादातर कांग्रेसी लीडर शामिल हुए, वहीं पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु हाजिर नहीं थे। जिसके चलते चर्चा है कि अभी भी पार्टी में अंदरुनी गुट्टबाजी जारी है। हालांकि आशु शुरुआत से ही दूसरे गुट के लीडरों और उनके पद्दों को सिरे से नकार रहे हैं। इन्हें देखकर लगता है कि शहर में अभी भी कांग्रेस दो गुट में हैं। बेशक हाईकमान की रिजर्व करने की चेतावनी के बाद कई लीडरों ने आपसी मनमुटाव दूर कर लिए थे। लेकिन अभी भी कई नेताओं में दूरियां बरकरार है। एक्सपर्ट मुताबिक अगर यह दूरियां इसी तरह रहीं तो विधानसभा चुनाव 2027 में पार्टी को इसका खमियाजा भुगतना पड़ सकता है।
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