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20 रुपये की बोतल के 30 रुपये वसूलने की शिकायत, मरीजों-तीमारदारों से कथित मनमानी पर कार्रवाई के निर्देश
चंडीगढ़ (Narendra Singh Danu) : पीजीआई चंडीगढ़ की न्यू ओपीडी और कार्डियक सेंटर स्थित कैंटीनों में पानी की बोतलों पर निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलने के आरोप सामने आए हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि 20 रुपये एमआरपी वाली पानी की बोतल 30 रुपये में बेची जा रही है, जिससे इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, पीजीआई में प्रतिदिन पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से 12 से 15 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। उनके साथ आने वाले तीमारदारों को मिलाकर अस्पताल परिसर में रोजाना करीब 28 से 30 हजार लोगों की आवाजाही रहती है। आरोप है कि अस्पताल परिसर से बाहर की जानकारी न होने का फायदा उठाकर कैंटीन संचालक कथित तौर पर अधिक कीमत वसूल रहे हैं। इस संबंध में कई शिकायतें पीजीआई प्रशासन तक भी पहुंच चुकी हैं। कैंटीन संचालकों का पक्ष कार्डियक सेंटर की कैंटीन के संचालक पवन छाबड़ा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि टेंडर की शर्तों के अनुसार प्रिंट रेट (एमआरपी) पर ही पानी बेचा जा रहा है। उनका कहना है कि 20 रुपये एमआरपी वाली बोतल 20 रुपये और 30 रुपये एमआरपी वाली बोतल 30 रुपये में ही दी जाती है। वहीं, न्यू ओपीडी कैंटीन के संचालक धीरज धवन ने कहा कि 20 रुपये वाली सामान्य पानी की बोतल के अलावा 30 रुपये में बेची जा रही बोतल प्रीमियम श्रेणी की है, जिसकी एमआरपी अलग है। प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर पंकज राय ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आ गया है और संबंधित शाखा को जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञ की राय उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता संदीप भारद्वाज के अनुसार, किसी भी उत्पाद की एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना या लेबल में बदलाव कर अधिक राशि लेना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार माना जा सकता है। उन्होंने उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय बिल लेने और एमआरपी का मिलान करने की सलाह दी। यदि ओवरचार्जिंग होती है तो बिल और उत्पाद के फोटो के साथ उपभोक्ता आयोग या संबंधित विभाग में शिकायत की जा सकती है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव है।