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नई दिल्ली 28 June। देश के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन बाजार में कभी अग्रणी मानी जाने वाली हीरो इलेक्ट्रिक अब लिक्विडेशन की ओर बढ़ गई है। कर्जदारों के बीच समाधान योजना पर सहमति न बनने, वित्तीय संकट, धोखाधड़ी के आरोपों और सरकारी सब्सिडी विवादों ने कंपनी के सफर को लगभग समाप्ति के मोड़ पर ला खड़ा किया है। हीरो इलेक्ट्रिक को भारत की शुरुआती इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन कंपनियों में गिना जाता था और एक समय यह कंपनी ईवी क्रांति का बड़ा चेहरा मानी जाती थी। जानकारी के अनुसार कंपनी के खिलाफ दिवालियापन समाधान प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे बचाने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन कर्जदारों की समिति किसी भी समाधान योजना पर आवश्यक सहमति तक नहीं पहुंच सकी। इसी गतिरोध के चलते कंपनी को लिक्विडेशन की प्रक्रिया में भेजे जाने की स्थिति बनी। लिक्विडेशन का अर्थ है कि कंपनी की संपत्तियां बेची जाएंगी और उससे प्राप्त राशि से देनदारियों का निपटारा किया जाएगा। हीरो इलेक्ट्रिक की मुश्किलें केवल वित्तीय संकट तक सीमित नहीं रहीं। कंपनी का नाम सरकारी इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी योजना से जुड़े विवादों में भी आया। आरोप लगे कि स्थानीयकरण नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसी कारण सब्सिडी रिकवरी और जांच जैसी कार्रवाई की चर्चा भी सामने आई। इन विवादों ने निवेशकों, कर्जदारों और बाजार के भरोसे को कमजोर किया। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि हीरो इलेक्ट्रिक का मामला भारतीय ईवी उद्योग के लिए बड़ा सबक है। केवल शुरुआती बढ़त, बड़ा नाम या ब्रांड पहचान किसी कंपनी को लंबे समय तक नहीं बचा सकती। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी संचालन, सरकारी नियमों का पालन और कर्जदारों का भरोसा किसी भी कंपनी के लिए अनिवार्य है। हीरो इलेक्ट्रिक का लिक्विडेशन ईवी सेक्टर के लिए चेतावनी है कि तेजी से बढ़ते बाजार में नियामकीय अनुपालन और मजबूत कारोबार मॉडल ही असली आधार हैं।