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उच्चीबस्सी रक्षा भूमि के बेहतर उपयोग और स्थानीय विकास की खन्ना ने उठायी मांग, दिए बेहतर सुझाव
होशियारपुर (दलजीत अज्नोहा) : पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से विशेष मुलाकात की। इस मौके खन्ना ने रक्षा मंत्री से पूर्व रक्षा अधिकारीयों कर्नल मलूक सिंह, कर्नल पी. एस. मन्हास, मेजर यशपाल सिंह द्वारा उन्हें सौंपे गए ज्ञापनों सम्बन्धी चर्चा करते हुए बताया कि उच्चीबस्सी सैन्य स्टेशन के आसपास के गांवों के निवासियों द्वारा लंबे समय से निर्माण एवं विकास संबंधी प्रतिबंधों के कारण आ रही कठिनाइयों सम्बन्धी जानकारी देते हुए उन्हें बताया कि यह सैन्य डिपो ब्रिटिश काल में स्थापित किया गया था। पहले इस क्षेत्र में आबादी कम थी परन्तु वर्तमान में अनेक गांव एवं आवासीय क्षेत्र विकसित हो चुके हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री को बताया कि नागरिकों को भवन निर्माण, नवीनीकरण एवं अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए अनुमति प्राप्त करने में जटिल और समय लेने वाली प्रक्रियाओं का सामना करना पड रहा है । खन्ना ने बताया कि इसके साथ साथ जिला के हरिआना क्षेत्र में रक्षा मंत्रालय की लगभग 31 एकड़ अनुपयोगी भूमि का उपयोग कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) संयंत्र की स्थापना किए जाने का प्रस्ताव भी प्राप्त हुआ है। भारत सरकार स्वच्छ ऊर्जा, पराली प्रबंधन तथा कृषि अपशिष्ट के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सीबीजी परियोजनाओं को प्रोत्साहित कर रही है। एच.पी.सी.एल. एवं गेल की टीमों द्वारा जून 2026 में स्थल का निरीक्षण किए जाने के बाद लगभग 15 एकड़ भूमि को इस परियोजना के लिए उपयुक्त माना गया है। खन्ना ने इस मौके रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सुझाव दिया कि रक्षा भूमि में प्रतिबंधित क्षेत्रों के निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल एवं समयबद्ध बनाया जाए तथा इसके स्थायी समाधान के लिए गोला-बारूद डिपो को कम आबादी वाले क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाए, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय नागरिकों की विकासात्मक आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके। खन्ना ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय सेना अधिकारियों, रक्षा संपदा विभाग, एच.पी.सी.एल., गेल तथा पर्यावरण विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त सर्वेक्षण कराने, न्यूनतम वनस्पति हटाने की आवश्यकता का आकलन किया जाये तथा अन्य उपलब्ध रक्षा भूमि को आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक भूमि के रूप में उपलब्ध करवाने पर गौर किया जाये। खन्ना ने कहा की रक्षा मंत्रालय का प्रयास स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, पराली जलाने की समस्या के समाधान, जैविक खाद निर्माण तथा स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।