चंडीगढ़/यूटर्न/26 जून। 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोपी और सस्पेंड किए गए आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार कथित तौर पर फरार हैं और उनका फ़ोन स्विच ऑफ़ है। 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कुमार की गिरफ्तारी की संभावना है, क्योंकि सीबीआई ने 2012 बैच के आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह और 2000 बैच के आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है। सिंह और अग्रवाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारियों ने कथित तौर पर हरियाणा सरकार के अधिकारियों (जिनमें आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं) के साथ मिलकर हरियाणा के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों के खातों से 657 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। इस मामले की जांच कर रहे ईडी ने घोटाले की रकम 645 करोड़ रुपये बताई है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि कुमार अपने घर से गायब हैं और फरार चल रहे हैं, साथ ही उनका फ़ोन भी स्विच ऑफ़ है।
एचएसपीसीबी से जुड़ी भूमिका
कुमार की भूमिका हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में हुए 169 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ी है, जहां उन्होंने 31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 तक सदस्य सचिव के तौर पर काम किया था। उन्हें हरियाणा सिविल सेवा से आईएएस में प्रमोट किया गया था। उन्होंने 1999 में करनाल में सिटी मजिस्ट्रेट के तौर पर अपना करियर शुरू किया था।
पहले डेटा एंट्री ऑपरेटर किया गिरफ्तार
CBI ने इससे पहले 23 जून को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डेटा एंट्री ऑपरेटर सौरव शर्मा को गिरफ्तार किया था। अगले दिन, पंचकूला की एक अदालत ने उन्हें चार दिन की CBI हिरासत में भेज दिया। आरोपी बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके, उन्होंने कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन करते हुए निजी बैंकों के पक्ष में निवेश की प्रक्रिया में मदद की, जिससे प्रदूषण बोर्ड को 169.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
कई कंपनियों के भेजी गई पेमेंट
HSPCB के खाते से पैसे कैपको फिनटेक सर्विसेज, दिशा ट्रेडर्स, मन्नत कॉन्ट्रैक्टर, SRR प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड, विटामेड सॉल्यूशंस और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स को भेजे गए थे। इसमें से 70 करोड़ रुपये से ज़्यादा 'स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स' को और 53 करोड़ रुपये से ज़्यादा 'कैपकप फिनटेक सर्विसेज़' को दिए गए। ये शेल कंपनियाँ (फर्जी कंपनियाँ) थीं जिन्हें आरोपियों ने पैसे की हेराफेरी करने के लिए बनाया था। एक और आईएएस अधिकारी, विनीत गर्ग, जो HSPCB के चेयरमैन थे, भी जाँच के दायरे में हैं। सरकार ने पहले ही 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' की धारा 17A के तहत उनकी जाँच करने की मंज़ूरी दे दी थी।
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