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कार्तिकेय चौहान ने राहुल गांधी का खेदपत्र स्वीकार किया; मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट को मामला समाप्त करने का आदेश दिया
नई दिल्ली/जबलपुर (narendra Singh Danu) : कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मानहानि मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को उच्च न्यायालय ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा दायर मानहानि मामले को समाप्त करने के निर्देश भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट को दिए। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी की ओर से पहले ही एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पनामा पेपर्स मामले का उल्लेख करते समय भ्रमवश (कन्फ्यूजन में) कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम लिया गया था और इसके लिए उन्होंने खेद व्यक्त किया। इस पर न्यायालय ने शिकायतकर्ता कार्तिकेय सिंह चौहान का पक्ष जानने के लिए उन्हें जवाब दाखिल करने का अवसर दिया। कार्तिकेय चौहान ने अदालत में राहुल गांधी का खेदपत्र स्वीकार करते हुए कहा कि यदि उनका नाम भूलवश लिया गया था और इस पर खेद व्यक्त किया जा चुका है, तो उन्हें अब मामले को आगे बढ़ाने पर कोई आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबित मानहानि के मामले को समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए। यह मामला वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान झाबुआ में आयोजित एक चुनावी सभा से जुड़ा है। आरोप था कि राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स प्रकरण का जिक्र करते हुए कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम लिया था, जिससे उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इसके बाद कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का परिवाद दायर किया था। एमपी-एमएलए कोर्ट ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया था, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनका बयान शिकायतकर्ता के संदर्भ में नहीं था और पनामा पेपर्स मामले में गलती से उनका नाम लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के अगले दिन सार्वजनिक रूप से इस पर खेद व्यक्त कर दिया गया था। गुरुवार की सुनवाई में शिकायतकर्ता की सहमति के बाद हाईकोर्ट ने मामले का निराकरण करते हुए मानहानि प्रकरण समाप्त करने का आदेश पारित कर दिया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की।