चंडीगढ़/यूटर्न/5 जून। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने शुक्रवार को बताया कि 2025-26 में भारत की जीडीपी में 7.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। मंत्रालय ने यह भी कहा कि जनवरी-मार्च 2026 की आखिरी तिमाही में ग्रोथ थोड़ी घटकर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि अक्टूबर-दिसंबर 2025 में यह 8 प्रतिशत थी (जिसे पहले 7.8 प्रतिशत अनुमानित किया गया था और बाद में बढ़ाया गया था)। अप्रैल-जून 2025 (6.7 प्रतिशत से 6.8 प्रतिशत) और जुलाई-सितंबर 2025 (8.4 प्रतिशत से 8.3 प्रतिशत) के जीडीपी ग्रोथ अनुमानों में भी मामूली बदलाव किए गए हैं। शुक्रवार को जारी पूरे साल की जीडीपी ग्रोथ का आंकड़ा (7.7 प्रतिशत) - जिसे प्रोविज़नल अनुमान कहा जाता है। एमओएसपीआई के दूसरे एडवांस अनुमान (7.6 प्रतिशत) से ज़्यादा है, जिसकी घोषणा फरवरी में की गई थी। 2024-25 में भारत की जीडीपी में 7.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।
आरबीआई ने अनुमान किया कम
जीडीपी के ये ताज़ा आंकड़े रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा 2026-27 के लिए अपने अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत करने के कुछ ही घंटों बाद आए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी कि हालांकि घरेलू मांग मज़बूत बनी हुई है और मैन्युफैक्चरिंग व सर्विस सेक्टर की गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन "कुछ सेक्टर में सुस्ती के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। सेंट्रल बैंक के नए अनुमान के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 में ग्रोथ 6.6 प्रतिशत, जुलाई-सितंबर 2026 में 6.3 प्रतिशत, अक्टूबर-दिसंबर 2026 में 6.5 प्रतिशत और जनवरी-मार्च 2027 में 6.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इससे पहले अप्रैल में, सेंट्रल बैंक को उम्मीद थी कि 2026-27 की चार तिमाहियों में देश की जीडीपी में 7.2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी।
जीडीपी के आंकड़े भारत की स्थिति करेगें मजबूत
जीडीपी के ताज़ा आंकड़े दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की स्थिति को और मज़बूत करते हैं, खासकर ऐसे समय में जब कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं धीमी ग्रोथ और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं से जूझ रही हैं। एफवाई2026 के दौरान मज़बूत घरेलू मांग, सरकार के लगातार कैपिटल खर्च, मज़बूत सर्विस सेक्टर की गतिविधि और मैन्युफैक्चरिंग में धीरे-धीरे हो रहे सुधार से ग्रोथ को सहारा मिला। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि दूसरे एडवांस अनुमान में 7.6 प्रतिशत से 7.7 प्रतिशत तक का बदलाव यह दिखाता है कि फाइनेंशियल ईयर के आखिरी हिस्से में आर्थिक गतिविधियां उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत रहीं।
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