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Kurukshetra: बांसुरी की साधना भगवान कृष्ण से साक्षात्कार करा सकती है: उस्ताद डॉ मुजतबा हुसैन - Uturn Time
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कुरुक्षेत्र में उस्ताद मुजतबा हुसैन का संदेश—बांसुरी से मिलते हैं कृष्ण
कुरुक्षेत्र (परमिंदर सिंह) : हरियाणा कला परिषद् एवं जीओ गीता गुरुकुल के सहयोग से आज बांसुरी वादन कार्यशाला के 14 वें दिन मुख्य अतिथि के रूप में पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के नृत्य विभाग में कार्यरत एवं अंतरराष्ट्रीय प्रख्यात बांसुरी वादक उस्ताद डॉ मुजतबा हुसैन उपस्थित रहे । उल्लेखनीय है कि कार्यशाला में प्रतिदिन प्रतिभागियों को किसी न किसी विद्वत जन के द्वारा आशीर्वाद दिलाया जाता है। सर्वप्रथम भगवद्गीता के स्वरूप के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया । मुख्य अतिथि ने गीता मनीषी परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी की सूक्ष्म उपस्थिति को नमन करते हुए सभी प्रतिभागियों को बांसुरी के महत्त्व को समझाते हुए इस पर "अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम" भजन को बांसुरी पर बजाना सिखाया । इससे पूर्ण प्रशिक्षार्थियों ने अब से पूर्व बांसुरी पर किए गए अभ्यासों का प्रदर्शन किया व मधुर षड्ज स्वर लगाने के लिए सभी को पूर्णांक देते हुए मुख्य अतिथि ने सभी का उत्साहवर्धन किया। अन्य अभ्यासों में प्रतिभागियों द्वारा गीता ज्ञान संस्थान की प्रार्थना "हे योगेश्वर, हे परमेश्वर, ऐसी कृपा प्रभु हम सब पे कर" तथा राष्ट्र गान को बांसुरी पर वादन कर अनूठा प्रदर्शन किया । कार्यशाला संयोजक डॉ सचिंद्र कुमार ने पिछले 13 दिन से चल रही बांसुरी वादन कार्यशाला की रिपोर्ट को मुख्य अतिथि समक्ष पेश किया गया। इसके उपरांत मुख्य अतिथि उस्ताद डॉ मुजतबा हुसैन ने अपने उद्बोधन में सभी प्रतिभागियों को आशीर्वाद देते हुए सभी को बांसुरी वादन कार्यशाला में भाग लेने पर बधाई दी व प्रतिभागियों में आजीवन बांसुरी वादन करने के लिए संकल्प लेने वालों का चयन किया । उनके द्वारा प्रतिभागियों को गुरु के प्रति सदा आदर एवं समर्पण की भावना रखने की प्रेरणा दी गई । हरियाणा कला परिषद् एवं जीओ गीता गुरुकुल का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें गीता ज्ञान संस्थानम में सेवा करके अत्यंत आत्मानंद की अनुभूति हो रही ह । उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में जब भी गीता ज्ञान संस्थान उनकी सेवा लेना चाहे वे नि:स्वार्थ भाव से तत्पर रहेंगे। । उन्होंने बांसुरी कार्यशाला की उपयोगिता पर अपने विचार रखते हुए संस्थान के सभी अधिकारियों व विशेष रूप से गीता मनीषी परमपूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरणा देने हेतु शुभकामनाएं अभिव्यक्त की। इसके उपरांत कार्यशाला के संचालक एवं प्रशिक्षक डॉ मनीश कुकरेजा, कार्यशाला संयोजक डॉ सचिंद्र कुमार, शिक्षा अधिकारी डॉ तरुण शास्त्री सह प्रशिक्षक पवन गुंबर, पुस्तकालय अध्यक्ष वेद मिश्रा, व सहायक प्रोफेसर देवेंद्र ने मुख्य अतिथि जी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। सभी प्रतिभागियों एवं उनके अभिभावकों ने कार्यशाला की सराहना की व कहा कि बांसुरी वादन कार्यशाला के चौदहवें दिन उन्हें सीखने को बहुत कुछ प्राप्त हुआ है। संस्थानम में नियमित की जाने वाली प्रार्थना "हे योगेश्वर हे परमेश्वर" की धुन बजाने से उन्हें आत्मानंद की अनुभूति हुई है। उन्होंने विचार रखा कि संगीत चाहे वह भक्ति संगीत हो या फिर बॉलीवुड संगीत या कोई अन्य, सभी प्रकार के संगीत ऐसा माध्यम हैं जिससे विश्व में आपसी प्रेम एवं भाईचारा कायम रह सकता है । सभी प्रतिभागियों को भक्ति रस में विभोर करते हुए उन्होंने "श्री कृष्ण गोबिंद हरे मुरारी", "गोबिंद बोलो हरि गोपाल बोलो" व "हरे कृष्ण "हरे कृष्ण हरे राम हरे राम" को बांसुरी पर वादन कर कृष्ण भक्ति में लीन कर दिया। लोगों की फरमाइश पर उन्हीं के द्वारा बालीवुड में गदर फिल्म में बांसुरी पर बजाया गया गीत "उड़ जा काले कांवा" व एक अन्य गीत "इक प्यार का नगमा है" को बांसुरी पर बजाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया । उनके साथ अंबाला से आई शिष्या ऋषिता वशिष्ठ व कैथल से आए अनुदीप ने भी अपनी अपनी प्रस्तुति दी। कार्यशाला का समापन शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण कर किया गया जिसे सहायक प्रोफेसर देवेंद्र जी द्वारा प्रायोजित किया गया ।