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Chandigarh: सीएम सैनी का सुझाव, टैंक बनाकर बढ़ाएं माइक्रो इरिगेशन - Uturn Time
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किसानों को पानी प्रबंधन की नई दिशा, सैनी ने दी सलाह
चंडीगढ़: नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों के हित में जल संरक्षण को बढ़ावा देते हुए टैंक निर्माण कर माइक्रो इरिगेशन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की बचत और फसलों की बेहतर उत्पादकता के लिए माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम) को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके लिए खेतों के पास जल भंडारण टैंक बनाए जाएं, ताकि सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस योजना को तेजी से लागू किया जाए और अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन-2047 के अंतर्गत सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अगले 5 वर्षों की कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग पुरातन प्रणाली से आगे बढक़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘पर ड्रोप-मोर क्रोप’ की अवधारणा को ध्यान में रखकर विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु सीमित जल संसाधनों वाले विकसित देशों की तर्ज पर भविष्य की योजनाएं बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संसाधन सीमित होने के बावजूद इनका बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। विभाग की योजनाएं धरातल पर भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि खेतों में खुले पानी के प्रयोग को नियंत्रित करने के लिए किसानों को जागरूक किया जाए। सिंचाई पर किसान द्वारा किए जाने वाले खर्च को न्यूनतम किया जाएगा। सरकार की जो योजना है उसके बाद किसान को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल लगाने की भी जरूरत नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शुरुआत में 9 जिलों, भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर व सिरसा में किसानों के गु्रप बनाकर कम से कम 10 एकड़ या इससे अधिक भूमि के लिए सामूहिक टैंक का निर्माण करवाएं जिन पर सरकार किसानों को 85 प्रतिशत सब्सिडी देगी। इन टैंकों में नहरों से पाइपों के माध्यम से पानी आपूर्ति की जाए और टैंकों पर सोलर पैनल लगाकर इससे जुड़े सभी खेतों में टपका सिंचाई अथवा फव्वारा सिंचाई की प्रणाली लगवाई जाए। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल पानी की बचत होगी, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा।