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Ludhiana: चीनी पर ‘नो एंट्री’! भारत ने सितंबर 2026 तक लगाया एक्सपोर्ट बैन, महंगाई रोकने की बड़ी तैयारी - Uturn Time
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चीनी के दाम काबू में रखने के लिए बड़ा फैसला
लुधियाना: घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को काबू में रखने और भविष्य में संभावित कमी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से सितंबर 2026 तक रोक लगा दी है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात को “रिस्ट्रिक्टेड” से बदलकर “प्रोहिबिटेड” श्रेणी में डाल दिया। यानी अब नई शुगर एक्सपोर्ट डील्स पर पूरी तरह रोक रहेगी। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में चीनी का क्लोजिंग स्टॉक तेजी से घटने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान है कि 2025-26 सीजन के अंत तक देश में केवल 45 लाख टन चीनी का स्टॉक बचेगा, जो 2016-17 के बाद सबसे निचला स्तर होगा। सरकार को डर है कि अल नीनो के कारण कमजोर मानसून, मिडिल ईस्ट संकट और खाद की संभावित कमी अगले सीजन के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि सरकार ने “पहले देश, फिर निर्यात” की नीति अपनाते हुए यह कदम उठाया है। हालांकि जिन खेपों की लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो चुकी थी या जो कस्टम विभाग को पहले ही सौंप दी गई थीं, उन्हें निर्यात की अनुमति रहेगी। यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को विशेष कोटा व्यवस्था के तहत होने वाला निर्यात भी जारी रहेगा। इससे पहले सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी निर्यात की मंजूरी दी थी और फरवरी 2026 में अतिरिक्त 5 लाख टन एक्सपोर्ट कोटा खोला गया था। लेकिन अब अचानक नीति बदलने से चीनी मिलों और व्यापारियों में बेचैनी बढ़ गई है। कई कंपनियां पहले ही विदेशी खरीदारों के साथ सौदे कर चुकी थीं। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बार उत्पादन अनुमान उम्मीद से कम रह सकता है और सीजन खत्म होने तक स्टॉक सिर्फ 40 लाख टन के आसपास पहुंच सकता है, जो घरेलू मांग के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। सरकार के फैसले का असर वैश्विक बाजार में भी तुरंत दिखा। न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स 2 प्रतिशत से ज्यादा उछल गए, जबकि लंदन में व्हाइट शुगर की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। ऐसे में भारत के एक्सपोर्ट रोकने से एशिया और अफ्रीका के कई देशों में सप्लाई पर असर पड़ सकता है। वहीं अब सबकी नजर सितंबर 2026 तक भारत के चीनी स्टॉक, मानसून और सरकार की अगली नीति पर टिकी रहेगी।