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Ludhiana: पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही प्रवासियों का पलायन, पंजाब के लिए बन सकती है बड़ी चुनौती - Uturn Time
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"लेबर शॉटेज की कमजोरी इंडस्ट्री को पड़ सकती है महंगी, फूंक फूंक रखने होंगे कदम"
लुधियाना (अशोक सहगल): पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही टेक्सटाइल के क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है बताया जाता है इनमें से अधिकतर मजदूरो मे बांग्लादेशी व अन्य लोग शामिल होने की चर्चाएं है संभव है की इनके पास भारतीय नागरिकता भी ना हो है , क्योंकि बंगाल टेक्सटाइल सैक्टर की बड़ी मंडी है ऐसे में पलायन करने वाले प्रवासीयो में कारीगरों की भी बड़ी संख्या हो सकती है इसलिए ये लोग बंगाल छोड़ने के बाद ऐसे राज्यों का रुख कर सकते हैं जहाँ भाजपा की सरकार ना हो ! गौरतलब है की पश्चिम बंगाल टेक्सटाइल और सस्ते गारमेंट का हब माना जाता है ! दूसरी और पंजाब भी फैशन एवं क्वालिटी गवर्नमेंट की बड़ी मंडी है ऐसे में दोनों राज्यों के कारोबारियों में पहले ही अच्छे कारोबारी सम्बन्ध कायम है ! वहीं पंजाब इंडस्ट्री वर्तमान समय में बड़े लेबर संकट से गुजर रही हैं इसलिए मुंकिन है की बंगाल से निकले प्रवासी कारीगरों के रूप में पंजाब की इंडस्ट्री को अपनी नई कर्मभूमि बना लें . ऐसे में आने वाले लोगों की मंशा जानने बिना नौकरी देना समझदारी नहीं होगी ल इसलिए आगामी समय में किसी भी बड़ी अनहोनी पर नियंत्रण रखने को नए कर्मचारियों को रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन को अनिवार्य बनाना होगा अन्यथा आने वाले समय में यह उद्योगपतियों के लिए गले की फांस बन सकते हैं। इनमें से कहीं टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं मजदूर बेहतर आर्थिक संभावनाओं को देखते हुए भारत छोड़ना नहीं चाहते और उन राज्यों की ओर पलायन कर सकते हैं जहां बीजेपी नहीं है। डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट के नारे ने किया काम: चुनाव के दौरान अवैध घुसपैठ को लेकर भाजपा के प्रसिद्ध नारे डिटेक्ट डिलीट डिपोर्ट में इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जिसके फल स्वरुप भाजपा के सरकार में आते ही पलायन का दौर शुरू हो गया रिवर्स पलायन भी हुआ शुरू : भाजपा की जीत के बाद, 5-6 मई 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की भारत-बांग्लादेश सीमा पर हलचल बढ़ गई है। जिसका कारण कई अवैध अप्रवासी भाजपा की कथित सख्‍त आईडी जांच और नागरिकता संबंधी चिंताओं के कारण वापस बांग्लादेश की ओर जाना शुरू कर दिए। बंगाली कारीगर लौटने लगे घर: 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान से पहले ही, डर और दबाव के कारण हजारों प्रवासी मजदूर वापस बंगाल लौट आए थे। वे अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मतदान को जरूरी मान रहे थे। बताया जाता है कि बंगाल से हजारों लोग अन्य राज्यों में कामकाज की तलाश में पलायन कर चुके थे जिनमे गुजरात दिल्ली तथा अन्य कई प्रदेश शामिल है है अपनी वोट के अधिकार को बचाने के लिए वह वापस बंगाल लौट आए और उन्होंने जमकर भाजपा के पक्ष में मतदान किया। इससे पहले कम्युनिस्ट पार्टी के दौर से इनका पलायन होना शुरू हो गया था भाजपा ने दी थी चेतावनी प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान 45 दिनों के भीतर सीमा को सील करने और "घुसपैठियों" को बाहर निकालने की गारंटी दी थी। सुरक्षा और रोजगार के वादे से बंगाली मजदूर लौटने लगे घर: नई भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार और "सिंडिकेट राज" को खत्म करने तथा राज्य में ही रोजगार के अवसर पैदा करने का वादा किया है, ताकि बंगाली मजदूरों को काम के लिए अन्य राज्यों में पलायन न करना पड़े। भाजपा की सरकार में निवेश की बढी उम्मीद: पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनते ही प्रदेश में भारी निवेश की संभावना भी प्रबल हो गई है जिससे टेक्सटाइल सहित अन्य इंडस्ट्री को और बल मिल सकता है