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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा मोहाली में जेईई मेन्स पास करने वाले 369 विद्यार्थियों का सम्मान, पंजाब अकादमिक उत्कृष्टता की ओर बढ़ रहा है - Uturn Time
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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज मोहाली में जेईई मेन्स परीक्षा पास करने वाले 369 विद्यार्थियों की सफलता को पंजाब की शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी सुधारों की प्रमाणिकता के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि कभी संघर्ष से जूझ रही व्यवस्था से लाचार विद्यार्थी अब पंजाब सरकार की "शिक्षा क्रांति" के चलते राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को "तारे ज़मीन पर" बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि उनकी शानदार सफलता केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जिसे विशेष अधिकार की बजाय एक अधिकार के रूप में लागू किया गया है, सशक्त शिक्षकों और निरंतर सुधारों के साथ मिलकर पंजाब के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल रही है। एक्स हैंडल पर बातचीत का वीडियो साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि विकास भवन, मोहाली में जेईई मेन्स परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाले 369 होनहार विद्यार्थियों को आज सम्मानित किया गया। इस शानदार उपलब्धि के लिए सभी विद्यार्थियों, उनके माता-पिता और शिक्षकों को दिल से बधाई और साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। उन्होंने आगे कहा कि हमारे मेहनती बच्चों को हर क्षेत्र में सफलता हासिल करते देखना बेहद गर्व और संतोष की बात है। मुझे पूरा विश्वास है कि ये युवा आने वाले वर्षों में और भी ऊंचाइयों को छुएंगे, जो न केवल अपने परिवारों बल्कि वैश्विक स्तर पर पंजाब का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि हम पंजाब के सरकारी स्कूलों को नई दिशा देने और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। विद्यार्थियों को आधुनिक और विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से हमारे शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण के लिए फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में भेजा जा रहा है। हमारी सरकार राज्य में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और ‘रंगला पंजाब’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के एकत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जेईई पास करने वाले ये विद्यार्थी ‘तारे ज़मीन पर’ हैं, जो पंजाब के युवाओं की अपार क्षमता का प्रतीक हैं। हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई ‘शिक्षा क्रांति’ अब ठोस और निर्णायक परिणाम दे रही है। यह केवल व्यक्तिगत सफलताएं नहीं हैं, बल्कि पंजाब में सरकारी शिक्षा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से किए गए प्रणालीगत सुधारों का स्पष्ट प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक पिछली सरकारों के दौरान शिक्षा को वह प्राथमिकता नहीं मिली, जिसकी वह हकदार थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचा कमजोर था, प्रणाली पुरानी हो चुकी थी और विद्यार्थियों के पास अवसरों की कमी थी, जिसके कारण पंजाब इस अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र में पीछे रह गया। उन्होंने कहा कि हालांकि हमारी सरकार ने इस प्रवृत्ति को बदलने के लिए अथक प्रयास किए हैं, जिनके ठोस परिणाम अब सामने आ रहे हैं। स्कूलों में दिखाई दे रहे बदलावों ने सरकारी शिक्षा की धारणा को बदल दिया है। इन विद्यार्थियों की सफलता इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब उन्हें सही माहौल दिया जाए तो वे देश में प्रतिस्पर्धा की अग्रिम पंक्ति में खड़े हो सकते हैं। विद्यार्थियों की उपलब्धियों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन विद्यार्थियों के समर्पण और लगन ने उम्मीदों और आकांक्षाओं को पुनः परिभाषित किया है। ये विद्यार्थी न केवल शैक्षणिक रूप से सफल हुए हैं, बल्कि दूसरों के लिए रोल मॉडल भी बन गए हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उत्कृष्टता केवल उच्च स्तरीय संस्थानों तक सीमित नहीं है। एक काव्यात्मक संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये विद्यार्थी ‘तारे ज़मीन पर’ हैं, जिनकी प्रतिभा हर तरह की चुनौतियों के बावजूद चमक रही है। उनका वास्तविक मुकाबला केवल अपने साथ पढ़ने वाले साथियों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर और उससे बाहर के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से है। शिक्षकों की भूमिका को नमन करते हुए उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक सच्चे राष्ट्र निर्माता होते हैं। शिक्षा में कोई भी बदलाव उनके समर्पण के बिना संभव नहीं है। युवा मनों को आकार देने में उनकी भूमिका और प्रतिबद्धता बेमिसाल है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पहले, शिक्षकों को अक्सर बुनियादी ढांचे की कमी और प्रशासनिक बोझ के कारण संघर्ष करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए हमारी सरकार ने प्रणालीगत बदलाव किए हैं, जिनमें गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों को संभालने के लिए कैंपस प्रबंधकों की भर्ती शामिल है। अब शिक्षक विशेष रूप से अध्यापन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जो उनकी मुख्य भूमिका है। यह शिक्षा क्षेत्र को बदलने में एक अहम कदम साबित हुआ है। सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमने सरकारी स्कूलों में माता-पिता और शिक्षकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अभिभावक-शिक्षक बैठकें शुरू की हैं। अभिभावक अब अपने बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदार बन गए हैं। यह साझेदारी विद्यार्थियों की बेहतर निगरानी, मार्गदर्शन और समग्र विकास सुनिश्चित करती है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कई विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं, जिनमें मजदूर परिवार भी शामिल हैं, फिर भी सरकारी स्कूल अब निजी स्कूलों के मुकाबले सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। यह शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने और विद्यार्थियों को कॉन्वेंट में पढ़े-लिखे विद्यार्थियों के साथ बेहतर ढंग से प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” उन्होंने कहा, “देश में दोहरी शिक्षा प्रणाली मौजूद है, जिसके तहत कुछ विशेषाधिकार प्राप्त लोगों को लग्जरी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है, जबकि दूसरी व्यवस्था बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए भी संघर्ष कर रही है। हमारी सरकार इस खाई को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी का अधिकार है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली माध्यम है। कोई भी कल्याणकारी योजना, कोई सब्सिडी और कोई भी कार्ड शिक्षा की तरह स्थायी बदलाव नहीं ला सकता। विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने चाहिए और समाज में रोल मॉडल बनना चाहिए। वे पंजाब का भविष्य हैं और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों को दिशा देगी।” शिक्षा सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “शिक्षकों को बेहतर पद्धतियां सीखने के लिए फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में भेजा जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षक वैश्विक स्तर की शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और फिर उन्हें पंजाब के स्कूलों की कक्षाओं में लागू करते हैं। यह हमारे विद्यार्थियों के भविष्य में दीर्घकालिक निवेश है, जो उन्हें प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आया है। शिक्षा अब केवल सीखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह अब इंटरैक्टिव, रोचक और आनंददायक बन गई है।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “विद्यार्थियों को अपने आराम क्षेत्र से बाहर निकलना चाहिए क्योंकि सुरक्षा और सफलता साथ-साथ नहीं चलती। कुछ असाधारण हासिल करने के लिए जोखिम उठाना जरूरी होता है। गूगल जैसी वैश्विक कंपनी ने भी एक गैराज से शुरुआत की थी। साधारण शुरुआत बड़े मुकाम हासिल करने में कोई बाधा नहीं होती। मैं और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस दोनों ही साधारण पृष्ठभूमि से आए हैं। केवल दृढ़ता, ईमानदारी और बड़े सपने देखने का साहस ही मायने रखता है।” अभिभावकों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “माता-पिता को अपने बच्चों पर करियर के विकल्प थोपने नहीं चाहिए। हर बच्चे में अलग-अलग प्रतिभा और अलग सपने होते हैं और उन्हें अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। हमारी सरकार मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है और विद्यार्थियों को विभिन्न करियर विकल्पों की खोज करने के लिए सक्षम बना रही है।” सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए मजबूत शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए वचनबद्ध हैं। हमें मिलकर ऐसे पंजाब के निर्माण के लिए ठोस प्रयास करने चाहिए जहां हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिले और उसे सफल होने का अवसर प्राप्त हो। ये सुधार केवल बुनियादी ढांचे या परिणामों को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्कृष्टता, नवाचार और सभी के लिए समान अवसर पैदा करने से जुड़े हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों की सफलता पंजाब के शैक्षिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह निरंतर सुधारों, समर्पित शिक्षकों, सहयोगी अभिभावकों और दृढ़ संकल्पित विद्यार्थियों के प्रभाव को दर्शाती है। हमारी सरकार द्वारा शिक्षा में निवेश जारी रखा गया है, जिससे एक सशक्त और जागरूक पीढ़ी का सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण, बेहतर बुनियादी ढांचा और विद्यार्थी-केंद्रित नीतियों जैसी पहलों के माध्यम से पंजाब सरकार शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाकर एक नया मानदंड स्थापित कर रही है। वह दिन दूर नहीं जब पंजाब हर क्षेत्र में, विशेषकर शिक्षा में, देश का नेतृत्व करेगा।” इस अवसर पर बोलते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “जब मैंने पद संभाला था, तब शिक्षा प्रणाली की स्थिति बिल्कुल खराब थी। विद्यार्थी अपनी उम्मीदें खो चुके थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में निरंतर प्रयासों और सुधारों के माध्यम से हमने महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं। अब हम विद्यार्थियों की प्रगति का व्यापक रिकॉर्ड रख रहे हैं, जिससे बेहतर ट्रैकिंग और सहायता संभव हो रही है।” सफलता हासिल करने के लिए अहम चुनौतियों को पार करने वाले विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए पंजाब सरकार की सराहना की। अमृतसर के स्कूल ऑफ एमिनेंस के विद्यार्थी रणदीप सिंह, जिनके पिता एक ऑटो चालक हैं, ने कहा, “मुझे स्कूल में दाखिला लेने के बाद ही जेईई के बारे में पता चला। स्कूल ने मेरे लिए नए दरवाजे खोल दिए और मुझे यह सपना देखने का विश्वास दिया।” होशियारपुर से प्रिया भारद्वाज ने कहा, “मेरे पिता के निधन के बाद मेरे परिवार को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सरकारी सहायता ने हमारी जिंदगी को फिर से संवारने में मदद की और मुझे अपने सपनों को साकार करने के योग्य बनाया।” पटियाला से नवजोत कौर ने कहा, “मेरे स्कूल में बेहतर सुविधाओं और सीखने के माहौल ने मेरी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।” डेरा बस्सी से मनप्रीत कौर ने कहा, “शैक्षणिक कैंपों ने मुझे अकादमिक चुनौतियों को पार करने में मदद की।” एसबीएस नगर से प्रिया कुमारी ने कहा, “स्कूल ऑफ एमिनेंस में दाखिला लेने के बाद सरकारी स्कूलों के प्रति मेरी सोच पूरी तरह बदल गई। यह स्कूल मेरे जैसे विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की किरण हैं और मैं यह भी अपील करती हूं कि उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाए।” मुल्लांपुर गरीबदास से प्रभजोत सिंह ने कहा, “मॉक टेस्ट और शैक्षणिक सहायता ने मुझे अपनी शंकाएं दूर करने और वित्तीय बाधाओं के बावजूद बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की।” फिनलैंड में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले एक शिक्षक ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय शिक्षण पद्धतियों की समझ ने कक्षा शिक्षण को बेहतर बना दिया है। यह अनुभव न केवल हमारे लिए शिक्षकों के रूप में, बल्कि हमारे विद्यार्थियों के लिए भी परिवर्तनकारी रहा है, जो अब नवाचारपूर्ण और प्रभावी शिक्षण विधियों का लाभ उठा रहे हैं।” इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस, शिक्षा विभाग की सचिव सोनाली गिरी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।