अजीत झा.
चंडीगढ़ 07 Jan । नगर निगम मेयर चुनाव से पहले चंडीगढ़ की राजनीति पूरी तरह गर्मा चुकी है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच बना गठबंधन अब अंदरूनी तनाव से गुजरता दिख रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी हर मोर्चे पर सतर्कता बरत रही है। सियासी गलियारों में जोड़-तोड़, रणनीति और समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने अपने पार्षदों को लेकर विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया है। पार्टी नेतृत्व प्रत्येक पार्षद की राजनीतिक स्थिति और रुख की नियमित रिपोर्ट ले रहा है। वरिष्ठ नेता व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क साधकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई भी पार्षद विपक्षी खेमे के प्रभाव में न आए। हाल के दिनों में आम आदमी पार्टी की दो पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।
29 जनवरी का चुनाव बना सियासी परीक्षा
29 जनवरी को होने वाले मेयर चुनाव को लेकर नगर निगम में हलचल चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही रणनीतिक बैठकों और संभावित गठबंधनों को लेकर लगातार मंथन कर रहे हैं। मौजूदा संख्या बल को देखते हुए चुनाव बेहद नजदीकी माना जा रहा है, जहां एक वोट भी नतीजा बदल सकता है।
इसी बीच भाजपा चंडीगढ़ प्रदेशाध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा की नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से हुई मुलाकात को भी राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है। इस बैठक में संगठनात्मक मजबूती और नगर निगम की रणनीति पर चर्चा होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे साफ है कि पार्टी शीर्ष स्तर पर चुनाव को लेकर गंभीर है।
सोशल मीडिया पर भिड़े आप-कांग्रेस नेता
मेयर चुनाव से पहले आप और कांग्रेस के बीच तनाव अब सार्वजनिक हो गया है। दोनों दलों के नेता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते नजर आए। इस जुबानी जंग ने विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गठबंधन की दरार और गहरी हुई तो साझा उम्मीदवार तय करना मुश्किल हो सकता है। इसका सीधा असर आप और कांग्रेस के पार्षदों के मनोबल पर भी पड़ सकता है। वहीं इस हालात से भाजपा को राजनीतिक बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, मेयर चुनाव से पहले चंडीगढ़ की राजनीति अनिश्चितता और रणनीतिक चालों के दौर से गुजर रही है, जहां हर कदम और हर बयान का सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।