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नगर निगम की लापरवाही उजागर: चंडीगढ़ में जल आपूर्ति व्यवस्था बदहाल - Uturn Time
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था चरमराने लगी है। पानी का प्रेशर लगातार कम हो रहा है, जिसके कारण पहली और दूसरी मंजिलों पर रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पर्याप्त पानी न मिलने से लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इसी संदर्भ में चंडीगढ़ नगर निगम के पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर एवं वार्ड नंबर 24 के पार्षद श्री जसबीर सिंह बंटी तथा पार्षद श्रीमती प्रेमलता ने सेक्टर-39 और सेक्टर-37 स्थित पब्लिक हेल्थ वाटर वर्क्स का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। पार्षदों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, तो हर वर्ष पानी के रेट में बढ़ोतरी किस आधार पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी गर्मी की शुरुआत ही हुई है और पानी की किल्लत विकराल रूप लेने लगी है। उन्होंने बताया कि पानी की कमी के चलते लोग वाटर टैंकर की मांग कर रहे हैं, लेकिन टैंकर 7 से 8 घंटे की देरी से पहुंच रहे हैं। इससे स्कूलों, घरों और विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हर वर्ष गर्मियों में पानी की मांग बढ़ती है, तो नगर निगम पहले से पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं करता और नए टैंकर क्यों नहीं खरीदे जाते। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई स्थानों पर इलेक्ट्रिक पैनल खराब हैं, जिससे पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। शहर के विभिन्न वाटर वर्क्स में लगी पंपिंग मशीनरी जर्जर हालत में है और पिछले दो वर्षों से कोई बड़ी मरम्मत या नियमित मेंटेनेंस नहीं की गई है। लगभग 60% मशीनरी पुरानी और अप्रचलित हो चुकी है, जिससे सिस्टम की कार्यक्षमता में 30–40% तक गिरावट आई है। मुख्य उपकरण जैसे पंप, मोटर, इलेक्ट्रिक पैनल और स्लूइस वाल्व खराब स्थिति में हैं। इसके अलावा, सक्शन और डिलीवरी एमएस पाइपलाइन पिछले 20 वर्षों से नहीं बदली गई हैं और केवल अस्थायी मरम्मत के सहारे काम चलाया जा रहा है। पब्लिक हेल्थ विभाग में नियमित सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर की कमी और अनुभवहीन अधिकारियों की तैनाती भी स्थिति को गंभीर बना रही है। पार्षद जसबीर सिंह बंटी ने बताया कि वर्ष 2020 में शुरू किया गया स्मार्ट सिटी मिशन प्रोजेक्ट अब तक अधूरा पड़ा है। डिविजनल ऑफिस को मरम्मत कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार नहीं दिए गए हैं। इसके बावजूद 1 अप्रैल से पानी के बिलों में वृद्धि कर दी गई है, जबकि नागरिकों को पर्याप्त जल आपूर्ति भी नहीं मिल रही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सेक्टर-39 वाटर वर्क्स और सेक्टर-37 के दौरे के दौरान डायरेक्ट सप्लाई सिस्टम में लगे कई बैक वॉटर वाल्व खराब पाए गए, जिनकी अब तक मरम्मत नहीं हुई है। कई स्थानों पर पानी का रिसाव हो रहा है, जिससे जल की बर्बादी हो रही है। मशीनरी पर जंग लग चुका है और बिजली के कई पैनल लंबे समय से खराब पड़े हैं, जो रखरखाव की भारी कमी को दर्शाता है।