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विश्व लीवर दिवस 2026: ‘द लैंसेट’ ने विश्व स्तर पर लीवर बीमारियों में वृद्धि की चेतावनी दी, पंजाब ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत तैयारी तेज की, स्क्रीनिंग का विस्तार - Uturn Time
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दुनिया भर में 19 अप्रैल को ‘सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रॉन्ग लीवर’ (‘स्वस्थ आदतें, स्वस्थ लीवर’) थीम पर मनाए जाने वाले विश्व लीवर दिवस के अवसर पर, ‘द लैंसेट’ की एक चेतावनी ने लीवर बीमारियों में तेजी से हो रही विश्व स्तर की वृद्धि को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार ‘मेटाबोलिक डिस्फंक्शन-एसोसिएटेड स्टेटोहैपेटिक लीवर डिजीज’ (एमएएसएलडी) के मामलों में 2050 तक तेज वृद्धि होने की संभावना है। इस चिंताजनक स्थिति के बीच, पंजाब इस चुनौती का डटकर सामना करने के लिए आगे बढ़ रहा है। राज्य ने विस्तृत स्क्रीनिंग और कैशलेस ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के माध्यम से अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है, जिससे वह आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी इस तेजी से बढ़ रही ‘मूक महामारी’ के खिलाफ भारत की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। दुनिया भर में लीवर संबंधी बीमारियां एक ‘मूक महामारी’ के रूप में उभर रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगभग हर तीन में से एक वयस्क व्यक्ति इससे प्रभावित है। यह ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अक्सर तब सामने आते हैं जब गंभीर नुकसान हो चुका होता है। ‘द लैंसेट’ का अध्ययन चेतावनी देता है कि मरीजों की संख्या 2023 में 1.3 अरब से बढ़कर 2050 तक 1.8 अरब हो सकती है, जो 42 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। भारत में भी इसी तरह का रुझान देखा जा रहा है, खासकर शहरी आबादी और उच्च-जोखिम समूहों में यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। पंजाब में डॉक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस-सी संक्रमण, शराब के सेवन और बदल रही खान-पान की आदतों के कारण स्थिति और गंभीर हो रही है। पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज (PILBS) के डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, “भारत में लीवर की गंभीर बीमारियों के मुख्य कारणों में शराब एक बड़ा कारण है और यह वायरल हेपेटाइटिस के साथ मिलकर हालत को और भी खराब कर देती है। फैटी लीवर डिजीज अब शराब और हेपेटाइटिस-सी के साथ एक मुख्य कारण के रूप में उभर रही है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना, तली हुई चीजें और ट्रांस-फैट्स का लंबे समय तक सेवन समस्या को बढ़ा रहा है।” डॉक्टर एक चिंताजनक बदलाव भी देख रहे हैं कि कम उम्र के मरीजों में लीवर की बीमारियां तेजी से सामने आ रही हैं। इसका मुख्य कारण शराब का बढ़ता सेवन और हेपेटाइटिस-सी का फैलाव है, जो राज्य में बदल रही जीवनशैली और व्यवहारिक रुझानों को दर्शाता है। स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में उन्होंने बताया, “पंजाब ने अपनी रेफरल प्रणाली को मजबूत किया है, जिससे लीवर बीमारियों की पहले की तुलना में जल्दी पहचान हो रही है। गांवों में स्क्रीनिंग और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच भी सुधरी है, हालांकि फैटी लीवर की ‘मूक’ प्रकृति के कारण देर से पहचान की समस्या अभी भी मौजूद है।” वित्तीय और पहुंच से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत कवरेज का विस्तार किया है, जो सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज प्रदान करती है। डॉ. सिंह बताते हैं कि मरीज के भर्ती होने पर, ज्यादातर टेस्ट और दवाइयां इस योजना के तहत कवर होती हैं, जिससे मरीज का जेब से होने वाला खर्च कम होता है। इस योजना में जांच, अस्पताल में दाखिला और विशेषज्ञ सेवाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना ने कई मरीजों को बेहतर इलाज प्राप्त करने में मदद की है और यह कई लोगों की जिंदगी बचाने में निर्णायक साबित हुई है। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने भी कहा, “यह योजना जेब से होने वाले खर्च को घटाती है, इसके साथ ही रोग की पहचान और इलाज में होने वाली देरी को रोकती है।” जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत विस्तृत स्क्रीनिंग से, शुरुआती पहचान में सुधार होने और बीमारी की प्रगति को धीमा करने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लीवर डिजीज के शुरुआती चरण को जीवनशैली में बदलाव जैसे बेहतर खुराक, नियमित शारीरिक गतिविधियां और शराब के सेवन में कमी करके अक्सर ठीक किया जा सकता है।