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केंद्रीय कैबिनेट 2029 के चुनावों तक 33% महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी, संशोधनों को दी जा सकती मंज़ूरी - Uturn Time
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चंडीगढ़/यूटर्न/8 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट मौजूदा कानूनों में संशोधन को मंज़ूरी देने के लिए तैयार है, ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों तक लंबे समय से अटके 33% महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। इस मकसद के लिए दो बिलों को मंज़ूरी मिलने की उम्मीद है - पहला, 2023 के 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के एक प्रावधान में संशोधन करने के लिए। इस प्रावधान के मुताबिक, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें 2026 की जनगणना के बाद होने वाली 'परिसीमन प्रक्रिया' के बाद ही आरक्षित की जा सकती हैं। दूसरे बिल के ज़रिए संविधान के 84वें संशोधन में बदलाव करना होगा, जिसके तहत भारत में परिसीमन पर 2026 तक रोक लगी हुई है। अब, परिसीमन की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने के लिए सरकार को इस रोक को हटाना होगा। सरकार की योजना लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में सीटों की संख्या में 50% की बढ़ोतरी करने और इन सदनों की बढ़ी हुई सदस्य संख्या के आधार पर महिलाओं को आरक्षण देने की है। महिला आरक्षण बिल 1990 के दशक से ही अटका हुआ है। तीन दशकों पुरानी मांग विधानमंडलों में महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग तीन दशकों से भी ज़्यादा पुरानी है। इसकी मुख्य वजह संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगातार कम होना है। यह प्रस्ताव पहली बार 1996 में एक बिल के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन राजनीतिक मतभेदों - खासकर पिछड़े वर्गों के लिए 'उप-आरक्षण' के मुद्दे पर - के चलते यह कई बार रद्द हो गया। एक-तिहाई आरक्षण लागू करने में सफलता जहां 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के ज़रिए स्थानीय निकायों में एक-तिहाई आरक्षण लागू करने में सफलता मिली, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे ही सुधार अटके रहे। 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का पारित होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी, लेकिन इसका क्रियान्वयन परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा होने के कारण, इसे असल में लागू करने में देरी हुई। ----