जगरांव/यूटर्न/1/अप्रैल। जगरांव शहर में नगर परिषद की कथित लापरवाही और बदइंतजामी के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर फट पड़ा है। वार्ड नंबर 6 के हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोगों का जीना दूभर हो गया है। कूड़े के पहाड़, बदबू, धुएं और ओवरफ्लो सीवरेज ने पूरे इलाके को मानो नरक बना दिया है। इसी के विरोध में वार्ड पार्षद जरनैल सिंह लोहट की अगुवाई में सैकड़ों लोगों ने जगरांव-बरनाला मुख्य मार्ग को जाम कर दिया, जिससे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।
गुस्साए लोग पहले नगर परिषद दफ्तर पहुंचे, लेकिन वहां कार्यकारी अधिकारी मोहित शर्मा और कार्यकारी प्रधान कंवरपाल सिंह की गैरमौजूदगी ने आग में घी डालने का काम किया। प्रशासन की इस बेरुखी से भड़के लोगों ने झांसी रानी चौक में धरना देकर सड़क जाम कर दी। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि राहगीरों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
धरने पर बैठे लोगों ने साफ कहा कि कूड़े के ढेरों से उठती जहरीली बदबू, उनमें लगाई जा रही आग का धुआं और सड़कों पर बहता सीवरेज का गंदा पानी उनके बच्चों की सेहत के लिए खतरा बन चुका है। बच्चे रोज गंदे पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं, लेकिन नगर परिषद आंखें मूंदे बैठी है।
पार्षद जरनैल सिंह लोहट ने नगर प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। मजबूर होकर जनता को सड़क पर उतरना पड़ा।
मौके पर पहुंचे डीएसपी जसविंदर सिंह ढींढसा और थाना प्रभारी परमिंदर सिंह ने हालात संभालने की कोशिश की, लेकिन लोग लिखित आश्वासन पर अड़े रहे। आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और कार्यकारी प्रधान कंवरपाल सिंह, उपप्रधान जगजीत सिंह जग्गी समेत एम.ई अशोक कुमार मौके पर पहुंचे। लंबी बातचीत के बाद लिखित भरोसा दिया गया कि कूड़ा उठाने के लिए 58 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार है और 10 दिनों के भीतर काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद धरना समाप्त हुआ।
धरने में बड़ा धमाका: 10 लाख की रिश्वत ऑफर का आरोप
यह पूरा मामला उस समय और ज्यादा गरमा गया जब पार्षद जरनैल सिंह लोहट ने सबके सामने कार्यकारी प्रधान कंवरपाल सिंह पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप जड़ दिए।
लोहट ने दावा किया कि उन्हें पहले 5 लाख रुपए देने की पेशकश की गई थी। यह रिश्वत कथित तौर पर पूर्व प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में समर्थन हासिल करने के लिए दी जा रही थी।
उन्होंने दो टूक कहा,“मैं बिकाऊ नहीं हूं। मैंने अपने ईमान के साथ समझौता नहीं किया और उसी की सजा आज मेरा वार्ड भुगत रहा है। हमारे इलाके के विकास कार्य जानबूझकर रोके जा रहे हैं।”
कार्यकारी प्रधान का जवाब: आरोपों से पल्ला झाड़ा
जब इन गंभीर आरोपों पर कार्यकारी प्रधान कंवरपाल सिंह से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सब झूठ है और ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। हालांकि, वह इस मुद्दे पर ज्यादा बोलने से बचते नजर आए और सवालों से कन्नी काट गए।
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने जगरांव नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक तरफ शहर के लोग कूड़े और गंदगी में जीने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ सियासी आरोप-प्रत्यारोप और रिश्वत के गंभीर आरोप व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या 10 दिनों में सचमुच सफाई अभियान शुरू होगा?
क्या रिश्वत के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
या फिर यह मामला भी बाकी मुद्दों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
फिलहाल, जगरांव की जनता जवाब मांग रही है और इस बार सवाल सीधे सिस्टम से हैं।