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संघर्ष, सेवा और संवेदना के प्रतीक: बाऊजी श्री ओम प्रकाश जिंदल जी - Uturn Time
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हरियाणा/यूटर्न/30 मार्च।दुनिया में कुछ महान व्यक्तित्व ऐसे होते है जिनका प्रभाव केवल उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहता बल्कि वे पीढ़ियों तक समाज को दिशा और प्रेरणा देते रहते है बाऊजी श्री ओम प्रकाश जिंदल जी ऐसे ही युगदृष्टा, कर्मयोगी और जननायक थे जिन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा, न्याय और मानवीय संवेदनाओं के लिए समर्पित कर दिया बाऊजी का मानना था कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नही बल्कि जनकल्याण और सामाजिक न्याय का सशक्त उपकरण है जब हरियाणा राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा था और देश स्वतंत्रता के चार दशक पार कर चुका था तब उन्होंने समाज की एक गंभीर सच्चाई को महसूस किया उन्होंने देखा कि संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ अंबेडकर की भावना के अनुरूप अभी भी दलितों, पिछड़ों, वंचितों और किसानों को उनका पूर्ण अधिकार और सम्मान नहीं मिल पाया है यही सोच उन्हें सक्रिय राजनीति में लेकर आई कुरुक्षेत्र की पावन भूमि को अपनी कर्मभूमि बनाते हुए बाऊजी ने वर्ष 1996 में जनता का विश्वास जीतकर संसद में प्रवेश किया उनका उद्देश्य स्पष्ट और दृढ़ था कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना बाऊजी केवल एक सफल उद्योगपति या कुशल राजनेता ही नहीं थे बल्कि वे एक संवेदनशील समाज सुधारक भी थे उन्होंने अपने जीवन का ध्येय दलितों, किसानों और वंचित वर्गों के उत्थान को बनाया संसद और हरियाणा विधानसभा में उनकी प्रभावशाली आवाज जहां नीतिगत बदलाव की मांग करती थी वहीं जमीनी स्तर पर उनके प्रयास समाज में वास्तविक परिवर्तन लाने में सहायक बने कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में उनका जनसंपर्क और जनसेवा का तरीका अद्वितीय था उन्होंने कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के लगभग 967 गांवों का दौरा कर ग्रामीण समाज की आवश्यकताओं को गहराई से समझा उन्होंने यह महसूस किया कि गांवों में चौपाल केवल एक स्थान नही बल्कि सामाजिक संवाद, एकता और सामूहिक निर्णय का केंद्र होती है इस विचार को साकार करते हुए उन्होंने प्रत्येक गांव में चौपाल निर्माण का संकल्प लिया और उसे पूर्ण भी किया उनकी यह व्यापक गांव दर गांव जनसंपर्क अभियान महात्मा गांधी की दांडी यात्रा की तरह जनजागरण और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गई बाऊजी का व्यक्तित्व और उनके कार्य आज भी कुरुक्षेत्र के जनमानस में जीवंत हैं। यही कारण है कि वहां की जनता के दिलों में उनके प्रति गहरी श्रद्धा और अपनापन है उनके आदर्शों और मार्गदर्शन पर चलते हुए उनके सुपुत्र एवं वर्तमान सांसद श्री नवीन जिंदल जी भी जनकल्याण के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। वे युवाओं, महिलाओं, किसानों और समाज के कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए समर्पित भाव से कार्यरत है श्री ओम प्रकाश जिंदल जी का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि सच्ची राजनीति वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति को सशक्त बनाए और न्याय को हर द्वार तक पहुंचाए उनका जीवन, उनका संघर्ष और उनकी सेवा भावना आज भी हम सभी के लिए एक प्रकाश स्तंभ के समान है। 31 मार्च 2005 को एक दुखद हेलिकॉप्टर दुर्घटना में उनका असमय निधन हो गया जिसने पूरे देश को शोकाकुल कर दिया आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते है