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चंडीगढ़/यूटर्न/28 मार्च।शहर को 31 मार्च तक ‘जीरो वेस्ट’ बनाने के दावों के बीच बिशनपुरा डंपिंग ग्राउंड की हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां कूड़े के बड़े-बड़े ढेर पहाड़ का रूप ले चुके हैं, जिससे नगर कौंसिल की योजना पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। कागजों में शहर भले साफ-सुथरा दिखाया जा रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। नगर कौंसिल ने नवंबर 2025 में सेंटन लाइफ कंपनी को करीब 16 करोड़ रुपए का दो साल का टेंडर दिया था। कंपनी को घर-घर से कूड़ा उठाने और रोजाना निकलने वाले करीब 90 टन कचरे के निपटारे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, मौजूदा हालात से साफ है कि डंपिंग ग्राउंड स्तर पर व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। शहर से कूड़ा उठाकर एक ही स्थान पर डंप किया जा रहा है, जहां उसका समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कूड़े के ढेर सुखना नदी के किनारे तक पहुंचने लगे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा इस क्षेत्र में कचरा डालने पर रोक के बावजूद यह हालात नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं। इससे पहले भी नगर कौंसिल को ऐसे मामलों में जुर्माना भरना पड़ चुका है। डंपिंग ग्राउंड पर आवारा पशुओं की भरमार, बदबू और मक्खियों के कारण आसपास के लोगों का जीना दूभर हो गया है। स्थानीय निवासियों में नगर कौंसिल के खिलाफ रोष लगातार बढ़ रहा है। बढ़ते कूड़े और पुराने ढेरों के कारण यह समस्या और विकराल होती जा रही है। कोटस मनोज कुमार, सैनिटरी इंस्पेक्टर “डंपिंग ग्राउंड से कूड़ा उठाने के लिए कंपनी पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। पहले 31 मार्च तक लक्ष्य था, लेकिन अब इसे 15 अप्रैल तक पूरा किया जाएगा।” बॉक्स सीर्थ मल्होत्रा, कंपनी प्रतिनिधि “सरकार की रोक के कारण फरवरी तक कूड़े की उठान प्रभावित रही। अब रोजाना करीब 300 टन कचरा उठाया जा रहा है और जल्द ही स्थिति सामान्य कर दी जाएगी