चंडीगढ़/यूटर्न/27 मार्च। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में उल्लेखनीय कटौती की गई है, जिससे ईंधन की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
सरकारी फैसले के तहत पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर ₹10 प्रति लीटर की ड्यूटी को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले का सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वैश्विक संकट के बीच राहत का फैसला
पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण यह उछाल देखने को मिला है, जिससे दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों में ईंधन कीमतों में 20% से लेकर 50% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में भारत सरकार का यह कदम आम लोगों को महंगाई से राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
‘जनहित को प्राथमिकता’
सुनील जाखड़ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने विकल्प था कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ जनता पर डाला जाए या खुद राजस्व में कमी स्वीकार कर राहत दी जाए और सरकार ने दूसरा रास्ता चुना।
उन्होंने कहा कि इस निर्णय से न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि तेल कंपनियों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी कुछ हद तक कम होगा।
निर्यात शुल्क भी लगाया गया
सरकार ने डीजल पर ₹21.5 प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर ₹29.5 प्रति लीटर का निर्यात शुल्क भी लगाया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अनुचित लाभ उठाने से रोकना है।
महंगाई के बीच राहत की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से परिवहन लागत में कमी आएगी, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इससे आम आदमी को महंगाई के दबाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं और अधिकांश देश बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं।