चंडीगढ़/यूटर्न/25 मार्च। शहर में प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है। प्रशासन ने नए कलेक्टर रेट लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगी। नए रेट लागू होने के साथ ही जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्कों में सीधा इजाफा होगा।
प्रशासन द्वारा जारी संशोधित दरों के अनुसार रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और कृषि भूमि के कलेक्टर रेट में 10 से 22 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर शहर के लगभग सभी सेक्टरों और प्रमुख बाजारों में देखने को मिलेगा।
रिहायशी सेक्टरों में बड़ा उछाल
शहर के पॉश सेक्टर-1 से 12 में रिहायशी जमीन का कलेक्टर रेट अब 2,37,900 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया गया है, जो पहले 1,78,600 रुपये था। सेक्टर-14 से 37 के लिए यह दर 1,81,300 रुपये प्रति वर्ग गज तय की गई है, जबकि सेक्टर-38 और उससे आगे के इलाकों में 1,33,200 रुपये प्रति वर्ग गज नया रेट लागू होगा।
हाउसिंग बोर्ड और फ्लैट्स भी महंगे
हाउसिंग बोर्ड फ्लैट्स के लिए भी नई दरें तय की गई हैं। ग्राउंड फ्लोर के लिए 11,000 रुपये प्रति वर्ग फुट, पहली मंजिल के लिए 9,000 रुपये, दूसरी मंजिल के लिए 8,000 रुपये और तीसरी मंजिल व उससे ऊपर के लिए 7,200 रुपये प्रति वर्ग फुट निर्धारित किए गए हैं। इंडिपेंडेंट मकानों और इंडस्ट्रियल हाउस की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है।
कमर्शियल प्रॉपर्टी में भी उछाल
शहर के प्रमुख बाजारों—सेक्टर-17, 8, 15, 19, 22, 34 और 35—में बूथ के कलेक्टर रेट बढ़कर 5,92,200 रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच गए हैं। वहीं मनीमाजरा मोटर मार्केट में 2,33,500 रुपये और शिवालिक एन्क्लेव में 4,10,200 रुपये प्रति वर्ग गज रेट तय किया गया है। अन्य कमर्शियल इलाकों में भी दरों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
इंडस्ट्रियल और अन्य क्षेत्रों में बदलाव
इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 और 2 में कलेक्टर रेट बढ़ाकर 86,000 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया गया है, जबकि फेज-3 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कोल डिपो, टिंबर मार्केट और ट्रांसपोर्ट एरिया के लिए 97,300 रुपये प्रति वर्ग गज दर तय की गई है।
अतिरिक्त शुल्क भी बढ़े
नए नियमों के तहत कॉर्नर प्लॉट पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। वहीं रिहायशी प्रॉपर्टी को नर्सिंग होम या अस्पताल में बदलने पर 25 से 31.25 प्रतिशत तक अतिरिक्त चार्ज लगाया जाएगा।
राजस्व बढ़ाने पर जोर
प्रशासन का मानना है कि नए कलेक्टर रेट लागू होने से राजस्व में वृद्धि होगी। हालांकि व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि पहले ही रेट काफी अधिक हैं और अब इन्हें लंबे समय तक स्थिर रखा जाना चाहिए।
नई दरों के लागू होने से प्रॉपर्टी बाजार में कीमतों में और उछाल आने की संभावना है, जिससे खरीदारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।