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हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने गुरुग्राम तथा झज्जर के अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक दिशा निर्देश निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार सभी उपायों के समयबद्ध व प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश अवैध सीवर वेस्ट डंपिंग, टैंकर माफिया व गैरकानूनी उद्योगों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश चंडीगढ़, 03 जनवरी— हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार ने शनिवार को गुरुग्राम में यमुना एक्शन प्लान के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण को लेकर गुरुग्राम तथा झज्जर के विभागीय अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में गुरुग्राम की बादशाहपुर की लेक एक, दो और तीन तथा झज्जर जिले की ड्रेन संख्या 8 एवं मुंगेशपुर ड्रेन को प्रदूषण से मुक्त करने के उद्देश्य से तैयार किए गए एक्शन प्लान की भी विस्तृत समीक्षा की गई। सदस्य सचिव ने संबंधित विभागों से इन सभी स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण हेतु किए जा रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट लेते हुए निर्देश दिए कि निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार सभी उपायों को समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से धरातल पर लागू किया जाए। बैठक में यमुना की स्वच्छता, सीवर प्रबंधन, अवैध डंपिंग, एसटीपी के संचालन तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान बैठक में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चीफ इंजीनियर बलराज अहलावत, बोर्ड के टेक्निकल एडवाइजर बाबूराम तथा सीनियर एनवायरनमेंट इंजीनियर जितेंद्र पाल भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सदस्य सचिव ने एजेंडा बिंदुओं पर विभागों से विस्तृत रिपोर्ट लेते हुए कहा कि संज्ञान में आया है कि गुरुग्राम के निगम क्षेत्र में कुछ टैंकर माफिया द्वारा सीवर का वेस्ट खुले में व नालों में छोड़ा जा रहा है, जो कि पर्यावरणीय नियमों के साथ-साथ कानून का भी गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, चालान किए जाएं तथा आवश्यकता अनुसार एफआईआर भी दर्ज करवाई जाए, ताकि यह अन्य लोगों के लिए उदाहरण बने। उन्होंने कहा कि एसटीपी को लेकर जो एसओपी तैयार की गई है, उसका सभी विभाग कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिए कि एसओपी में निर्धारित मुख्य बिंदुओं के अनुसार धरातल पर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और अगली बैठक में प्रत्येक बिंदु पर टिप्पणियों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने सीवर हाउसहोल्ड कनेक्शनों की स्थिति पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पहले कितने घरेलू सीवर कनेक्शन थे और वर्तमान में कितने हैं, इसकी एक विस्तृत तुलनात्मक रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके साथ ही एक विशेष ड्राइव चलाकर अधिक से अधिक घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़ा जाए तथा नागरिकों को जागरूक करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि एसटीपी से उपचारित (ट्रीटेड) पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए और निजी कॉलोनियों में भी ग्रीन बेल्ट तथा पार्क आदि में इसी उपचारित जल का उपयोग किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध औद्योगिक इकाई स्वीकार्य नहीं है। इस संबंध में संबंधित विभाग नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई करें। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के विषय पर निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि नालों/ड्रेनों की सफाई के दौरान निकाले गए कचरे की मात्रा पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि नालों में कहीं भी कूड़ा या प्लास्टिक आधारित कचरा न डाला जाए। साथ ही एसटीपी से निकलने वाली स्लज की मात्रा की नियमित मॉनिटरिंग कर उसकी रिपोर्ट तैयार की जाए, ताकि यह आकलन किया जा सके कि संयंत्र वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य कर रहे हैं या नहीं। उन्होंने आरएमसी के अवैध प्लांट्स के विरुद्ध भी नियमों के तहत अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यमुना एक्शन प्लान के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि यमुना नदी को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने में हम सब मिलकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार ने बैठक के उपरांत विकास सदन तथा सेक्टर-51 में स्थापित वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशनों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दोनों स्टेशनों की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्था, रियल-टाइम डेटा रिकॉर्डिंग, उपकरणों की कार्यक्षमता एवं रखरखाव की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वायु गुणवत्ता से संबंधित आंकड़ों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा प्राप्त डेटा की शुद्धता व पारदर्शिता बनाए रखने में कोई कोताही न बरती जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशनों से प्राप्त सूचनाएं प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए उपकरणों का नियमित मेंटेनेंस और किसी भी तकनीकी खामी का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।