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हृदय रोगों की महामारी का एक कारण ट्रांस फैट ! - Uturn Time
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वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद सरकार नहीं दे रही ध्यान
अशोक सहगल लुधियाना, 22 मार्च/यूटर्न : समाज में बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामलों जिसमें काफी संख्या में युवा वर्ग भी शामिल है ठीक कर्म में ट्रांस फैट भी मुख्य कारण माना जाने लगा है ट्रांस फैट भले ही हृदय रोगों का महामारी बनने के कारणों में आज मुख्य कारण माना जा रहा है परन्तु वैज्ञानिकों की चेतावानियों के बावजूद सरकारें अभी जागरुक नहीं हुई। जिसके चलते किसी भी खाद्य पदार्थ में ट्रांस फैट है या नहीं अभी तक राज्य में एक भी सैंपल की जांच नहीं हुई हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार ट्रांसलेट रक्त में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है जबकि बुरे कोलेस्ट्रॉल को काफी बढ़ा देता है जिससे हृदय रोग का खतरा उत्पन्न हो जाता है पर हृदय धमनियों में जमकर रक्त आपूर्ति का मार्ग अवरुद्ध करने लगता है। फलस्वरूप इसका परिणाम हार्ट अटैक, हृदय धमनी रोग के रूप में सामने आता है। यह वनस्पति यानी पार्शियल हाईड्रोजेनेटिड वैजीटेबल ऑयल, सरसों के तेल को अधिक गर्म करने पर इनमें कृत्रिम फैट के रूप में उत्पन्न होता है। यही नहीं माहिर इसे कैंसर, मधुमेह, ब्लड प्रैशर बढ़ने का भी कारण मानने लगते हैं। सूत्र बताते हैं कि राज्य में अभी तक ट्रांस फैट के लिए किसी लैब में इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है। राज्य में एक भी सैम्पल की नहीं हुई जांच क्या कहते हैं विशेषज्ञ एक प्रमुख हार्ट सर्जन के अनुसार खाद्य वस्तुओं के अलावा जब घर पर इस्तेमाल करने वाले किसी तेल को इतना गर्म किया जाता है कि उसमें धुआं निकलने लग जाए तो इसका मतलब कि इसमें ट्रांस फैट बनने लग गया है। बार-बार गर्म कर इस्तेमाल में लाना बहुत खतरनाक है क्योंकि उनमें ट्रांस फैट की मात्रा बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल शीघ्र गर्म होता है उसमें ट्रांस फैट अधिक घनता है। इसलिए लोगों की ऐसे तेल खाने को कहा जाता है जिनका स्मोक प्वाइंट अधिक है। वे जल्दी धुआं नहीं छोड़ते। पंचम अस्पताल के हृदयरोग विशेषज्ञ डा.आर.पी. सिंह, जो खाद्य तेलों पर एक शोध भी कर चुके हैं, का कहना है कि किस तेल में दशाई गई घटकों की मात्रा सही है या नहीं। इस पर भी अभी जांच होनी बाकी है। फिर निरंतर एक तेल का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि किसी तेल में किसी एक घटक की मात्रा खाद्य कम है ती किसी दूरसे वेल में अधिक, इसलिए तेलों में एक समान तत्वों संबंधी कड़े दिशा-निर्देश अभी लागू नहीं किए गए। इसके अलावा सरसों के तेल को गर्म करना नहीं चाहिए बल्कि सब्जियां बनाते समय इसे बिना गर्भकिए सब्जियों में साथ ही डाला जान्न चाहिए। तेल गर्म कर इस्तेमाल करने से बनने वाला ट्रांस फैट हार्ट के लिए खतरनाक और जानलेवा है। किन वस्तुओं में मिलता है ट्रांसफेट बाजार में मिलने वाले फास्ट फूड, पिज्जा बर्गर के अलावा बेकरी उत्पादों में यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इनमें पेस्ट्री पैटी, बिस्कुट, केक पर लगाई जाने वाली क्रीम के अलावा डीप फ्राई वस्तुओं जिनमें पूरी, समोसे, पकौड़े व अन्य फ्राइड वस्तुएं शामिल हैं। अगर कोई व्यक्ति 3 से 4 ग्राम ट्रांस फैट का सेवन रोज करता है तो तसे हृदय व अन्य रोगों का खतरा 25 प्रतिशत बढ़ जाता है। हैदराबाद स्थित इंस्टीच्यूट ऑफ न्यूट्रीशियन के वैज्ञानिक काफी पहले से ही इस संबंधी चेताधानियां दे चुके हैं। बाजार में तेल को बार-बार किया जाता है गर्म, बन जाता है जहर वनस्पति तेलों व सरसों के तेल का बार बार गर्म कर इस्तेमाल करना आम है। कोई भी दुकानदार तेल को एक बार इस्तेमाल कर नहीं फैकता। लिहाजा तेलों से घातक खतरे बने रहते हैं। सूत्र ती यह भी बताते हैं कि जब बड़े दुकानदारों द्वारा बार-बार तेल के इस्तेमाल से वह काला पड़ जाता है तो उसे रेहड़ी वालों की बेच दिया जाता है। जो सीधा जहर का काम करता है और पहले पेट में जाने पर पेट के अलसर के रूप में अपना प्रभाव छोड़ता है। इस्तेमाल किए हुए तेल के सैंपल अक्सर हो जाते हैं फेल पर सख्त कार्रवाई नहीं होती गौर तलब है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा फूड बिजनेस ऑपरेटर से इस्तेमाल किए गए तेल के सैंपल अधिकतर जांच में फेल हो जाते हैं परंतु इसके बावजूद स्वास्थ विभाग में कैसे लोगों के प्रति साफ करना रखने वाले बहुत से लोग हैं यहां तक की सरकार की पॉलिसी भी ऐसी हैं कि आरोपी साफ बच जाते हैं इस्तेमाल किया हुआ तेल जिसके सैंपल जांच में फेल हो जाते हैं उन्हें मिस ब्रांडेड कहकर टाल दिया जाता है और कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती इसे ना खाने योग्य या अनसेफ डिक्लेयर किया जाना चाहिए राज्य में जांच की सुविधा नहीं जहां तक खाद्य वस्तु में ट्रांसफेट की जांच करने का प्रश्न है तो स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि राज्य में चंडीगढ़ स्थित सरकारी लैब में ट्रांस फैट की जांच की कोई सुविधा नहीं है जिसके चलते अब तक एक भी सैम्पल की जांच नहीं हुई और ना ही उन्हें ट्रांस फैट की जांच के लिए सैंपल लेने को कहा जाता है पर मामला अगर लोगों को जान से जुड़ा हो तो आपात स्थिति में जांच किसी दूसरी लैब से भी कराई जा सकती है और राज्य में स्थित सरकारी लैब में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जा सकता है