लुधियाना/ यूटर्न/21 मार्च।पंजाब के बहुचर्चित चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। अदालत ने दोषी को कम से कम 50 वर्ष तक बिना किसी रियायत के वास्तविक कैद भुगतने का आदेश दिया है।
जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी की सीमा पर जरूर खड़ा है, लेकिन जांच में सामने आई कमियां मौत की सजा देने में बाधा बनती हैं।
अदालत ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, हालांकि जांच के दौरान कुछ गंभीर खामियां भी उजागर हुईं। इनमें अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति पर संदेह, मुख्य गवाह के बयान में विरोधाभास और एक महत्वपूर्ण गवाह का अदालत में पेश न होना शामिल है।
घटना 28 दिसंबर 2023 की है, जब आरोपी चार साल की बच्ची को उसके दादा के चाय स्टॉल से बहला-फुसलाकर ले गया था। इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई और शव को छिपा दिया गया। करीब 20 दिन बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि दुष्कर्म के बाद सबूत मिटाने की कोशिश में की गई। अदालत ने कहा कि समाज की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन हर मामले में अपरिवर्तनीय दंड देना अनिवार्य नहीं होता।
साथ ही, अदालत ने पीड़ित परिवार को 75 लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं और POCSO Act के तहत 25 वर्ष की सजा भी सुनाई है।
अदालत ने भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि पीड़िता की “गलती” सिर्फ इतनी थी कि वह एक असहाय और मासूम बच्ची थी। यह घटना समाज और व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है। कोर्ट ने शिक्षा और सामाजिक मूल्यों में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि ऐसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।