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पंजाब में गऊ सैस पर बड़ा सवाल: 118 करोड़ का हिसाब गायब, 11 साल बाद भी नियम अधूरे - Uturn Time
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पंजाब/ यूटर्न/21 मार्च। बेसहारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए लागू किए गए गऊ सैस को लेकर पंजाब सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विधानसभा की सबऑर्डिनेट लेजिस्लेशन कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया है कि 2018 से 2021 के बीच एकत्रित करीब 118 करोड़ रुपये का स्पष्ट हिसाब उपलब्ध नहीं है। 11 साल बाद भी नियम अधूरे साल 2014 में लागू पंजाब गौ सेवा कमीशन एक्ट , 2014 के तहत गऊ सैस लगाया गया था, लेकिन हैरानी की बात है कि 11 साल बीतने के बाद भी इसके नियम पूरी तरह अधिसूचित नहीं किए जा सके हैं। कमेटी ने सरकार को जल्द नियम नोटिफाई करने की सिफारिश की है। फंड ट्रांसफर में लापरवाही रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि विभिन्न विभागों द्वारा वसूला गया गऊ सैस डिप्टी कमिश्नरों तक सही तरीके से ट्रांसफर नहीं किया जा रहा। इससे फंड के उपयोग पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऑडिट नहीं, उपयोग पर संदेह कमेटी ने पाया कि गऊ सैस फंड का महालेखाकार से ऑडिट तक नहीं कराया जा रहा, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि पैसे का सही उपयोग हुआ या नहीं। कमेटी ने तत्काल ऑडिट कराने की सिफारिश की है। मैरिज पैलेस और अन्य स्रोतों से कम वसूली रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मैरिज पैलेस और सीमेंट जैसे स्रोतों से अपेक्षित गऊ सैस नहीं मिल रहा। कमेटी ने सख्ती दिखाते हुए सुझाव दिया है कि सैस जमा न करने वाले मैरिज पैलेस के लाइसेंस रद्द किए जाएं। पीड़ितों को नहीं मिल रहा मुआवजा बेसहारा पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है, जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश मौजूद हैं। जमीन पर नहीं दिख रहा असर गऊ सेवा आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सैस तो एकत्रित हो रहा है, लेकिन विभागों के बीच तालमेल की कमी के चलते इसका उपयोग पशुओं की देखभाल या उन्हें कैटल पाउंड में शिफ्ट करने में नहीं हो पा रहा। परिणामस्वरूप, सड़कों पर बेसहारा पशुओं की समस्या जस की तस बनी हुई है। कमेटी की इस रिपोर्ट के बाद अब सरकार की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।